उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने बड़ा खुलासा किया है। कुल 12.43 करोड़ मतदाताओं वाली सूची में 2.27 करोड़ डुप्लीकेट (नकली या दोहराव वाले) नाम पाए गए हैं। ये नाम काटे जा सकते हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। आयोग ने जिलाधिकारियों (DM) को इनकी जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्य कारण: डुप्लीकेट एंट्रीज की पहचान
राज्य निर्वाचन आयोग ने AI टूल्स और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नाम, पिता का नाम, लिंग और उम्र जैसे पैरामीटर्स का मिलान किया।
इससे 90.76 लाख मतदाताओं के नाम 2-3 जगहों पर दर्ज मिले, जो कुल 2.27 करोड़ डुप्लीकेट एंट्रीज का कारण बने।
आयोग के अनुसार, ये दोहराव पुरानी सूचियों के मर्जर या गलत रजिस्ट्रेशन से हुए हैं। जांच पूरी होने पर सभी डुप्लीकेट नाम स्थायी रूप से काट दिए जाएंगे।
इससे 90.76 लाख मतदाताओं के नाम 2-3 जगहों पर दर्ज मिले, जो कुल 2.27 करोड़ डुप्लीकेट एंट्रीज का कारण बने।
आयोग के अनुसार, ये दोहराव पुरानी सूचियों के मर्जर या गलत रजिस्ट्रेशन से हुए हैं। जांच पूरी होने पर सभी डुप्लीकेट नाम स्थायी रूप से काट दिए जाएंगे।
जांच की स्थिति: धीमी प्रगति पर आयोग नाराज
आयोग ने अगस्त 2025 में सभी DMs को विस्तृत सूची (नाम-पते सहित) भेजी थी।
अक्टूबर 2025 तक केवल 6% (13.28 लाख) की जांच हुई, जिसमें 1.63 लाख नाम काटे गए और 11.22 लाख वैध पाए गए।
बाकी 2.14 करोड़ की जांच लंबित है। आयोग ने 15 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट मांगी है, लेकिन कई जिलों (जैसे आजमगढ़, कौशांबी, गोंडा, प्रयागराज आदि) में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने DMs की लापरवाही पर नाराजगी जताई और पंचायत चुनावों में देरी की आशंका व्यक्त की।
अक्टूबर 2025 तक केवल 6% (13.28 लाख) की जांच हुई, जिसमें 1.63 लाख नाम काटे गए और 11.22 लाख वैध पाए गए।
बाकी 2.14 करोड़ की जांच लंबित है। आयोग ने 15 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट मांगी है, लेकिन कई जिलों (जैसे आजमगढ़, कौशांबी, गोंडा, प्रयागराज आदि) में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने DMs की लापरवाही पर नाराजगी जताई और पंचायत चुनावों में देरी की आशंका व्यक्त की।
अन्य जिलों में SIR का असर
SIR प्रक्रिया पूरे राज्य में चल रही है, जहां मृतक, स्थानांतरित या सत्यापन में अनुपस्थित मतदाताओं के नाम भी काटे जा रहे हैं:
उन्नाव: 2.23 लाख नाम हटाए गए (स्थान परिवर्तन, घर न मिलना, मृत्यु आदि कारणों से)।
मेरठ: 5 लाख से अधिक संदिग्ध नाम, जिनमें कैंट में 1.20 लाख और सरधना में 82 हजार प्रभावित हो सकते हैं।
हरदोई: 78,577 नाम हटाए गए, जबकि 3.59 लाख नए मतदाता जोड़े गए।
राजनीतिक विवाद
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि 1.5-3 करोड़ वोट कट सकते हैं, खासकर मुस्लिम, दलित और पिछड़े इलाकों में। उन्होंने BLOs (Booth Level Officers) पर दबाव और पक्षपात का आरोप लगाया। हालांकि, आयोग का फोकस सूची शुद्धिकरण पर है।








