लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 28 जुलाई 2025 को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव का नाम लेकर यह टिप्पणी की, क्योंकि वे विपक्ष के रवैये और सर्वदलीय बैठक में सपा के प्रतिनिधियों के व्यवहार से नाराज थे। बिरला ने कहा कि अखिलेश को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में ऐसे नेताओं को भेजना चाहिए, जो निर्णय लेने की क्षमता रखते हों और जो बैठक में एक बात कहें, लेकिन सदन में अलग रवैया न अपनाएं। यह टिप्पणी उस समय आई, जब लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हो रही थी। बिरला ने अखिलेश से अपील की कि वे अपने नेताओं को ठीक से समझाकर भेजें, ताकि सर्वदलीय बैठक में लिए गए निर्णयों का सदन में पालन हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई पीछे से निर्णय ले रहा है, तो ऐसे में प्रतिनिधि भेजने से बचें।
इस बयान का संदर्भ यह था कि सर्वदलीय बैठक में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की सहमति बनी थी, लेकिन विपक्ष, खासकर सपा सांसद, सदन में अन्य मुद्दों, जैसे बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR), पर चर्चा की मांग कर रहे थे, जिससे हंगामा हो रहा था। बिरला ने इस असंगति पर नाराजगी जताते हुए अखिलेश को निशाना बनाया।

