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गुनाह कोई करे शर्मिंदगी सबको उठानी पड़े!

बिहार के ‌ मुख्यमंत्री रहे‌ नीतीश कुमार से यूं तो ‌ जब वे‌ लोहिया विचार मंच‌ से जुड़े ‌जमीनी कार्यकर्ता के रूप में खास तौर से तिगड़ी‌ वशिष्ठ नारायण सिंह, ‌ रघुपति‌ तथा नीतीश कुमार के रूप में कार्य करते थे तभी से संबंध जुड़ गया था। अपने तजुर्बे की बिना पर कह सकता हूं कि उस दौर के‌ समाजवादी नौजवानों में वैचारिक रूप से सबसे प्रखर ‌ जानकार‌ नीतीश कुमार ही थे। पद पर रहते हुए भी ‌ सामने पढ़ने पर अदब, ‌ खुलूस‌ विनम्रता का ‌ व्यवहार उन्होंने मेरे साथ किया है। सत्ता की डगर पर‌ शुरुआती‌ नाकामयाबी के बावजूद,‌ एमएलए, एमपी‌ केंद्रीय मंत्री तथा बिहार के कई बार के मुख्यमंत्री पद पर ‌ रहने के बावजूद‌ अब यह इंसान सत्ता की हविस में ‌ सरेआम नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्ति के पांव छूने की ‌ हद तक चला गया। और अब भाजपा ने इस हालत में‌ इन्हें पहुंचा दिया कि उनके लिखे गए रहम पत्र पर ‌ अपने ‌ दस्खत करने पर मजबूर हो गया।
हर कोई इस बात से वाकिफ है की एक वक्त नीतीश कुमार को हिंदुस्तान में विरोधी पक्ष की ओर से भावी प्रधानमंत्री के‌ रूप में ‌ देखा जा रहा था।‌‌ जो तथाकथित‌ वामपंथी‌,‌ बुद्धिजीवी कांग्रेसी राज में मलाई चाट रहे थे‌ उनको नीतीश कुमार की आड़ में‌ सोशलिस्टों ‌‌ पर हमला करने का एक मौका और मिल गया। सत्ता की भूख में‌ फिसलते गद्दारी करते, ‌ लोग किस‌ इतिहास तंजीम में‌ नहीं रहे? क्या केवल उनका ही जिक्र किया जाएगा, ‌ हजारों हजार ऐसे कार्यकर्ता और नेता जो अपनी विचारधारा से बंधकर‌ ताउम्र‌ हर तरह की दुश्वारियां, परेशानियां को भोगते ‌हुए‌ अपनी विचारधारा मे फख्र महसूस करते हुए‌ लगे हुए हैं क्या उनकी कोई अहमियत नहीं? यह भी अजीब विडंबना है की एक वक्त जो‌ कभी सोशलिस्ट ‌ रहा हो हर कुकर्म करने के बावजूद हमेशा के लिए उसको सोशलिस्ट मानकर किसी तंजीम को बदनाम करना कहां तक जायज है?
नाम लेना वाजिब नहीं जिन-जिन नेताओं ने अपनी विचारधारा ‌ को दफन कर‌ सत्ता के ‌ लालच में‌‌ गद्दारी की उनका आखिरी हश्र क्या हुआ वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। बिहार की सियासत में ‌ हमारे गौरव ‌ ‌ भूपेंद्र नारायण मंडल, रामानंद तिवारी, कर्पूरी ठाकुर, ‌ रहे हैं, ‌ नीतीश कुमार जैसे इतिहास के कूड़ेदान में जाने वाले ‌ नेताओं से हमारा कोई सरोकार नहीं।

‌ – राजकुमार जैन

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