प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के गया में 22 अगस्त 2025 को एक जनसभा में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रस्तावित विधेयक पर बोलते हुए कहा कि अगर एक छोटा सरकारी कर्मचारी 50 घंटे की हिरासत में सस्पेंड हो सकता है, तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को भी गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन से अधिक हिरासत में रहने पर पद से हटना चाहिए। उन्होंने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा और संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखेगा। मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जेल से सरकार चलाने की कोशिश भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करती है, जैसा कि हाल के कुछ मामलों में देखा गया, जहां जेल से फाइलों पर हस्ताक्षर और आदेश जारी किए गए।
यह विधेयक, जिसमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं, 20 अगस्त 2025 को गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किया गया। इसके तहत, यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 5 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध में 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन वह स्वतः पद से हट जाएगा। विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है, लेकिन विपक्ष ने इसे संविधान विरोधी और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का हथियार बताया है, जिससे संसद में तीखी बहस की संभावना है।

