विवाद की शुरुआत और फैलाव
कानपुर से शुरूआत: यह मामला 4 सितंबर 2025 को कानपुर के रावतपुर (सैयद नगर) में बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) जुलूस के दौरान शुरू हुआ। जुलूस के रास्ते पर ‘I Love Mohammad’ लिखे बैनर और बोर्ड लगाए गए थे, जो हिंदू धार्मिक जुलूसों के मार्ग पर स्थित इलाके में थे। पुलिस ने इसे ‘नया रिवाज शुरू करने की कोशिश’ बताते हुए 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एफआईआर बैनर के कारण नहीं, बल्कि हिंदू धार्मिक पोस्टर्स को नुकसान पहुंचाने के आरोप में हुई थी।
देशव्यापी फैलाव: विवाद कानपुर के बाद लखनऊ, बरेली, नागपुर, काशीपुर, हैदराबाद, मऊ और महाराष्ट्र जैसे शहरों तक पहुंच गया। मुस्लिम संगठनों ने इसे ‘धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला’ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं। बरेली में 26 सितंबर को पथराव और लाठीचार्ज की घटना हुई, जिसमें 12 गिरफ्तारियां हुईं और 10 पुलिसकर्मी घायल हुए। मऊ में भी झड़पें हुईं। कुल मिलाकर, कानपुर/यूपी में 20+ एफआईआर, 1,000+ नामजद और 40+ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। उत्तराखंड के काशीपुर में तोड़फोड़ और बुलडोजर कार्रवाई भी हुई।
वाराणसी में स्थिति
जुलूस और गिरफ्तारियां: 25-27 सितंबर के आसपास दालमंडी इलाके से बिना अनुमति ‘I Love Mohammad’ जुलूस निकाला गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने सिगरा, दशाश्वमेध और लोहता थानों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की। शुरुआत में 4 नामजद (अजहर, नफीस, इरफान, आदिल) गिरफ्तार हुए, और 10 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया। धारा 144 के उल्लंघन, शांति भंग और नारेबाजी के आरोप हैं। कुल 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें ‘सर तन से जुदा’ जैसे उग्र नारों के मामले शामिल हैं।
काउंटर कैंपेन: विवाद के जवाब में वाराणसी में संत समाज ने 25 सितंबर को ‘I Love Mahadev’ पोस्टर्स लगाए, जिसकी अगुवाई जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद ने की। यह पोस्टर वॉर मठों, मंदिरों और सार्वजनिक जगहों पर फैला, जिससे धार्मिक माहौल और गरमाया। सोशल मीडिया पर ‘I Love Ram’, ‘I Love Ganesh’ जैसे ट्रेंड्स भी चले, और हास्य के लिए ‘I Love Rasgulla’ भी वायरल हुआ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम संगठनों का समर्थन किया और ट्वीट किया, “I LOVE MOHAMMAD. This is not a crime.”
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने एफआईआर की आलोचना की: “तीन शब्दों के कारण गिरफ्तारी? यह कैसे संभव है?”
बीजेपी नेता सैयद जफर ने कहा, “विश्वास व्यक्त करना अलग है, लेकिन सड़क पर इस तरह प्रदर्शन अनुचित है।”
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू की है और आरएएफ तैनात किया है। वाराणसी पुलिस का संदेश साफ है: “कानून व्यवस्था से कोई खिलवाड़ नहीं बर्दाश्त होगा।” कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि जांच जारी है।
यह विवाद धार्मिक भावनाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी सीमाओं के बीच संतुलन का सवाल उठा रहा है। स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, और आगे के अपडेट्स पर नजर रखी जा रही है।







