2025 में ट्रंप प्रशासन ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत भारत पर रूस से तेल खरीद के कारण पेनल्टी टैरिफ लगाया, जो कुल मिलाकर 25-50% तक पहुंच गया था। फरवरी 2026 की शुरुआत में भारत-अमेरिका के बीच इंटरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क पर सहमति बनी, जिसमें US ने भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया (रूस से तेल खरीद बंद करने और अन्य शर्तों के बदले)। यह डील मार्च में फाइनल साइन होने वाली थी।
US सुप्रीम कोर्ट का फैसला (20 फरवरी 2026)
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि ट्रंप IEEPA के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के ऐसे व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगा सकते। यह फैसला टैरिफ को अवैध ठहराता है।
इससे IEEPA आधारित सभी टैरिफ (जिसमें भारत पर 18% वाला शामिल) अमान्य हो गए। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि इससे भारत के ज्यादातर एक्सपोर्ट्स (लगभग 55-60%) पर टैरिफ MFN रेट्स (2-3% औसत) पर वापस आ सकते थे, यानी काफी कम।
लेकिन ट्रंप ने तुरंत क्या किया?
कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया और Section 122 (Trade Act of 1974) के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया। यह सभी देशों पर लागू है और 150 दिनों तक चल सकता है (फरवरी 24 से प्रभावी)।
व्हाइट हाउस और ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका डील अभी भी वैलिड है, लेकिन नए 10% ग्लोबल टैरिफ के तहत भारत अब 10% टैरिफ देगा (18% की जगह)। ट्रंप ने कहा कि भारत 18% देता रहेगा, लेकिन अधिकांश अपडेट्स और व्हाइट हाउस क्लैरिफिकेशन में यह 10% पर सेटल हुआ है (टेम्पररी, जब तक नई अथॉरिटी नहीं आती)।
अब भारत कितना टैरिफ देगा?
वर्तमान में (21 फरवरी 2026 तक): भारत के एक्सपोर्ट्स पर US टैरिफ 10% (ग्लोबल टैरिफ के तहत) है। यह 18% से कम है।
कुछ सेक्टर (जैसे स्टील, एल्युमिनियम, ऑटो पार्ट्स) पर Section 232 टैरिफ (25-50%) अलग से जारी रह सकते हैं, जो कुल एक्सपोर्ट का छोटा हिस्सा हैं। यह 10% टेम्पररी है (150 दिन), और आगे क्या होगा यह ट्रेड नेगोशिएशंस या नई कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा। भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए राहत है क्योंकि पहले 18% (या 50%) से अब कम हो गया, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।






