वोटबैंक के लिए और कितना गिरेंगे नेता ?

चरण सिंह 

 

कभी सोचा न था कि राजनीति का स्तर इतना गिर जाएगा। वोटबैंक के लिए नेता इतने गिरकर बात करने लगेंगे। सेना को भी राजनीति में घसीटने लगेंगे। मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर की एक नायिका सोफ़िया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया तो समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव ने ऑपरेशन की दूसरी नायिका विंग कमांडर व्योमिका सिंह को जाति से जोड़कर दलित की संज्ञा दे दी। विजय शाह को हिन्दू मुस्लिम दिखाई दे रहा है तो रामगोपाल यादव को पीडीए। इन नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं कि इनके व्यवहार से इन दोनों बेटियों के दिल पर क्या गुजर रही होगी ?
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह देश की वे बेटियां हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर 100 आतंकियों को मार गिराया। सेना में तो कोई जातिवाद और धर्मवाद नहीं होता। आरक्षण भी नहीं होता पर ये नेता हैं कि सेना में भी जाति और धर्म घुसेड़ दे रहे हैं। राम गोपाल यादव को भारत और पाकिस्तान युद्ध में भी पीडीए दिखाई दे रहा है। अपने को चौधरी चरण सिंह का शिष्य बताने वाले राम गोपाल यादव क्या समाजवाद को भूल गए हैं। क्या उनके लिए पीडीए ही अब समाजवाद है।
समाजवादी पार्टी के नेता क्या बताएंगे कि समाजवाद की परिभाषा क्या है ? क्या पीडीए से गैर बराबरी खत्म हो जाएगी ? पीडीए का राग अलापने वाले राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव क्या बताएंगे कि पीडीए के लिए समाजवादी पार्टी ने क्या किया है ? समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्ष की मुख्य पार्टी है। समाजवादी पार्टी ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के लिए कितने आंदोलन किये ? रामगोपाल यादव को तब दलितों की याद नहीं आई जब हाथरस में एक बाबा की चरण रज लेने के चक्कर में 122 दलित स्वर्ग सिधार गए।

रामजी लाल सुमन से जो राणा सांगा को गद्दार कहलवाया। उससे दलितों को क्या फायदा हुआ ? महापुरुषों का अपमान कराकर वोट हासिल करने की रणनीति बनाने वाली पार्टी के नेता जाति और धर्म से बाहर नहीं निकल पा गए हैं। रामगोपाल यादव बताएं कि डॉ. लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, कर्पूरी ठाकुर, लोक नायक जयप्रकाश या फिर नेताजी किसी जाति विशेष के नेता रहे हैं। भले ही इन नेताओं ने दबे कुचले लोगों की आवाज उठाई हो पर  ये नेता किसी जाति विशेष से नहीं बंधे रहे। खुद समाजवादी पार्टी ने छोटे लोहिया के नाम से जाने जाने वाले जनेश्वर मिश्र, ठाकुर अमर सिंह, मोहन सिंह, बृजभूषण तिवारी  जैसे समाजवादी नेता रहे हैं। मतलब काम कुछ मत करो बस जाति धर्म करते रहो। ऐसा नहीं है कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी ही जाति धर्म का खेल खेल रही हों दूसरी पार्टियां भी जाति और धर्म से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

  • Related Posts

    जाति का विनाश’: संतराम बीए, आंबेडकर और गांधी के बीच वाद-विवाद और संवाद

    सिद्धार्थ रामू संतराम बीए (14 फरवरी, 1887 –…

    Continue reading
    जंतर-मंतर-2 : लोकतंत्र की बेचैनी और युवाओं की नई करवट

    नीरज कुमार जंतर-मंतर-2 शुरू हो चुका है। ऐसा…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    Rajya Sabha : बीजेपी ने घोषित किये 8 प्रत्याशी, बनाया जातीय समीकरण! 

    Rajya Sabha : बीजेपी ने घोषित किये 8 प्रत्याशी, बनाया जातीय समीकरण! 

    SC ने नहीं दी थी फॉर्म 6 की इजाजात? प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए ‘ECI पर सवाल 

    SC ने नहीं दी थी फॉर्म 6 की इजाजात? प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए ‘ECI पर सवाल 

    ‘हमने मॉडिफाइड फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी’, CEC विवाद के बीच CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

    ‘हमने मॉडिफाइड फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी’, CEC विवाद के बीच CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

    इंडिया गठबंधन में क्या गुल खिलाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य 

    इंडिया गठबंधन में क्या गुल खिलाएंगे स्वामी प्रसाद मौर्य 

    दिल्ली रेप: SC में पुलिस को फटकार, जज ने कहा- ‘…तो अपराधियों को लगे कि मारे जाएंगे’

    दिल्ली रेप: SC में पुलिस को फटकार, जज ने कहा- ‘…तो अपराधियों को लगे कि मारे जाएंगे’

    जीते जी जिनको दिया, तानों का उपहार

    जीते जी जिनको दिया, तानों का उपहार