नई दिल्ली। दिल्ली का प्रदूषण हर साल सर्दियों में सिरदर्द बन जाता है, लेकिन अब सरकार की नई पहल से उम्मीद की किरण दिख रही है। ‘नमो वन’ नामक शहरी वनों का प्रोजेक्ट राजधानी को ‘सिटी लंग्स’ देने का वादा कर रहा है। यह जंगल न सिर्फ हवा को साफ करेंगे, बल्कि जैव विविधता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मददगार साबित होंगे। आइए, जानते हैं इसकी पूरी डिटेल्स।
‘नमो वन’ प्रोजेक्ट क्या है?
मुख्य उद्देश्य: दिल्ली में हरित कवर बढ़ाना और वायु प्रदूषण को कम करना। ये वन PM-2.5 और अन्य हानिकारक कणों को सोखने में सक्षम होंगे, जिससे शहरवासी साफ हवा में सांस ले सकें।
दिल्ली सरकार ने 15 ‘नमो वन’ (शहरी वन) विकसित करने का फैसला किया है, जो कुल 177 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैलेंगे। इसके अलावा, 2 मियावाकी वन (जापानी तकनीक से तेजी से बढ़ने वाले घने जंगल) भी बनाए जाएंगे, जिससे कुल 17 नए शहरी वन होंगे। सबसे बड़ा वन: उत्तरी दिल्ली के अलीपुर में 28 एकड़ का ‘नमो वन’ बनेगा, जो पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा होगा। कार्य नवंबर 2025 से शुरू होने की उम्मीद है। अभी साइट चयन पूरा हो चुका है, और जल्द ही पौधरोपण व विकास कार्य तेज होगा।
कहाँ-कहाँ बनेंगे ये वन?
सरकार ने 15 जगहों का चयन किया है, लेकिन विस्तृत लोकेशन लिस्ट अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई। कुछ प्रमुख साइट्स:
क्या इससे प्रदूषण कम होगा? वास्तविकता क्या है?
फायदे: अध्ययनों के मुताबिक, एक एकड़ जंगल सालाना 20-30 टन CO2 सोख सकता है। दिल्ली के मौजूदा 21% हरित कवर को ये वन 25% तक ले जा सकते हैं, जो AQI को 20-30 पॉइंट्स कम करने में मददगार होगा। मियावाकी वन विशेष रूप से PM-10 और PM-2.5 को
40% तक फिल्टर करते हैं।
प्रदूषण सिर्फ वनों से नहीं रुकेगा। दिल्ली का AQI अक्सर 400+ पार करता है, जो पराली जलाने, वाहनों और उद्योगों से आता है। इसलिए, ये वन एक कदम हैं, लेकिन GRAP (Graded Response Action Plan) और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा जैसे अन्य उपायों के साथ ही असरदार होंगे। सरकार का दावा: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “ये ‘नमो वन’ दिल्ली को हरा-भरा बनाकर प्रदूषण से जंग लड़ेंगे।” भाजपा सरकार इसे अपना ‘दृढ़ संकल्प’ बता रही है।








