नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद विपक्षी दल सवाल खड़े कर रहे हैं। AIMIM के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसी के भी विरोध-प्रदर्शन करने के खिलाफ क्यों है। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विरोध करने के अधिकार को सही ठहराया है, इसलिए जब तक हिंसा न हो, विरोध-प्रदर्शन की इजाजत होनी चाहिए।
AIMIM चीफ ने इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन लड़कों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं था। उन्हें आसानी से जमानत या नोटिस दिया जा सकता था। CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड का कथित उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की सूची से हाल ही में हटा दिया है और उसकी जगह तीन नए स्थान इसके लिए निर्धारित किए हैं। इस संबंध में 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश भी जारी किया गया। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया जब राष्ट्रीय राजधानी के लुटियंस इलाके में हाल के महीनों में कई प्रदर्शन देखे गए जिससे देश की सरकार के सत्ता के केंद्र में कई सड़कों व मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा और बड़े पैमाने पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती देखी गई। पुलिस के आदेश के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।







