“पत्रकार था साहब देशवासियों के हित में भ्रष्टाचार का” पोल” खोल कर रख दिया था इस लिए मार दिया गया मैं कोई नेता थोड़ी हूं जिसके लिए पक्ष विपक्ष चर्चा करेंगे”

मोहम्मद हिफजान

रिजवान पत्रकार दोस्तों हैडलाइन पढ़ करके आप तो अंदाजा लगा ही लिए होंगे कि आखिर आज हमारी कलम कहना क्या चाहती है। तो आइये सीधा विषय पर आते हैं और इस लेख को शांतिपूर्वक पूरा पढ़िएगा समझ में आ जाएगा
वह चाहे छत्तीसगढ़ का मामला हो या फिर उत्तर प्रदेश का बिहार हो या मध्य प्रदेश का माना जाए तो भारत का कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां पर पत्रकारों की बेरहमी से हत्या न कर दी गई हो।
और जहां भी पत्रकार की हत्या की गई वह मामला भ्रष्टाचार से ही जुड़ा हुआ सामने निकल कर आया वह सड़क घोटाला मामला हो या फिर किसी तहसील में धान बिक्री का मामला हो।
यह फिर कोई और विभाग का भ्रष्ट लोगों का पोल पट्टी खोलने का मामला हो।
जिसके लिए एक ईमानदार निर्भीक निष्पक्ष लिखने वाले पत्रकार को मौत के घाट उतार दिया जाता है और कुछ दिन हमारे पत्रकार साथी अपने संगठन के माध्यम से या फिर अपनी पत्रकारता एकता के माध्यम से धरना प्रदर्शन करते हैं पत्रकारों के हित की मांग करते हैं और मांग करते-करते धीरे-धीरे सब कुछ नॉर्मल हो जाता है और 6 महीने साल भर नहीं गुजरते तब तक कहीं ना कहीं कोई और पत्रकार भ्रष्टाचारियों का शिकार होकर अपने घर परिवार अपने पत्रकार साथियों से दूर हो जाता है। ट्रैफिक पुलिस में चले जाइए ट्रैफिक पुलिस बोलेगी गर्दा गब्बर झील कर 9:00 बजे से लेकर 9:00 बजे रात्रि तक ड्यूटी करता हूं प्रदूषण झेलता हूं मेरे जगह आकर कोई खड़ा हो जाए उसके बाद हमें गलत बताएं।
सिविल पुलिस कहती है मैं अपने परिवार से दूर होकर देशवासियों का रक्षा करता हूं अपने पैसों से किसी भी मामले को रफा दफा करता हूं समय से दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती हम पर आरोप लगाने से पहले चौकी थाने पर बैठकर देख लो।
नेताओं की भावनाओं को समझो नेताओं को मीटिंग से फुर्सत नहीं मिलती 5 वर्ष के लिए कुर्सी मिली है तो 5 वर्ष में अपना अस्तित्व भी बनाना है वह सब करना है जो शायद अभी तक संभव नहीं था। इसी तरह से बड़े अधिकारी वह चाहे किसी भी विभाग के हो वह भी अपने आप को दूध के धूले ही बताएंगे।
पर सवाल यह खड़ा होता है की सब के सब जब ईमानदार हैं कोई भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है तो आखिर घोटाला क्यों होता है भ्रष्टाचार क्यों होता है जिससे एक आम नागरिक के जेब पर असर पड़ता है जो गरीब तबके का है जो मिडिल क्लास का है जमीन सब चीजों को मध्य नजर रखते हुए पत्रकार अपनी जिम्मेदारियां को निभाते हैं देश हित के लिए काम करता है आम जनमानस को इन भ्रष्टाचारियों से बचने के लिए अपने कलाम का उपयोग करता है और सरकार तक सच्चाई पहुंचाना चाहता है तभी उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती है।
कोई सेफ्टी टैंक में चुनवा दिया जाता है तो कोई बीच चौराहे पर चार-चार गोलियां का शिकार हो जाता है तो कोई लापता करवा दिया जाता है।
और बदले में उसके परिवार को मिलता क्या है सिर्फ और सिर्फ आंखों में आंसू हंसती खेलती जीवन को गम में बदलने का एहसास। फिर ना तो इस पर कोई विपक्ष का नेता किसी पत्रकार के लिए पक्ष पर सवाल करता है खुलकर और ना ही पक्ष उसे पीड़ित पत्रकार परिवार को सरकारी नौकरी आर्थिक मदद साथ ही उसके बच्चों के भविष्य के लिए भी कुछ नहीं सोचती।
आखिर एक पत्रकार जो वाकई में बेसिक के लिए समाज के लिए अच्छे नेताओं के लिए ईमानदार अधिकारियों के लिए इन सबके लिए आपने जान को बड़ी पर लगाकर भ्रष्टाचारी यो को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रणभूमि में आता है और देखते-देखते वह अपनी मौत को ही गले से लगा लेता है।
मैं अपने पत्रकार साथियों को इस लेख के माध्यम से सिर्फ और सिर्फ यही संदेश देना चाहता हूं की आपका कोई पत्रकार साथी काम करते-करते शहीद हो जाता है तो हम लोग क्या करते हैं उनके शांति के लिए मौन धारण करते हैं उनको न्याय दिलाने के लिए धरना प्रदर्शन करते हैं और उससे मिलता क्या है इसलिए हमारे जितने भी पत्रकार साथी हमारे इस लेखक को पढ़ रहे हैं उनसे यही गुजारिश है विनती है की एक पत्रकार की ताकत उनकी एकता है वह चाहे सोशल मीडिया यानी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के पत्रकार हैं या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीवी चैनल के पत्रकार हैं या फिर प्रिंट मीडिया कोई अखबार के पत्रकार सब एक हैं किसी पत्रकार को कोई भी पत्रकार साथी नीचा दिखाने का काम ना करें और एक पत्रकार के लिए डिजिटल मीडिया प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का छुआछूत मिटा कर गंदे से कंधा मिलाकर साथ चले तो शायद किसी भ्रष्टाचारियों की औकात नहीं की एक पत्रकार को मारवा सके।
हमारी पत्रकारिता हमारा मीडिया जगत हमारी स्वतंत्रता आज इसलिए कमजोर हो

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