गुलदार की समस्या बन न जाए शहर वासियों के लिए बहुत बड़ा जोखिम!!

आजकल जनपद बिजनौर के अंतर्गत एक भीषण समस्या गुलदार की बन चुकी है!! जिसकी चपेट में पिछले 1 साल से 24 व्यक्तियों की जान सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जा चुकी है, कई जाने जो गुलदार के हमले से गई हैं उनका लेखा-जोखा भी नहीं है साथ ही कई लोग जो मोटरसाइकिल बैलगाड़ी स्कूटर से चलते हैं वह घायल भी हुए हैं जिनकी संख्या लगभग सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 30 है!
इसके अलावा पालतू जानवर बछिया बकरी कुत्ता बिल्ली घोड़ी आदि भी जो अपना रैन बसेरा जंगलों में पेड़ों में रहकर छुपाकर ही करते थे वह भी बहुत संख्या में गुलदार का शिकार हो चुके हैं जिनका भी कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं रखा गया है! ! इसके अलावा जंगली जानवर माही गीदड़ हिरन आदि जंगलों में से विलुप्त हो गए हैं! !
गुलदार के कारण अधिकतर किसानों ने अपने खेतों पर समूह में जाना शुरू कर दिया है और अधिकतर किसानों ने अपने खेतों पर जाना बंद भी कर दिया है जिसे देखा जाए तो खेती को भी भारी नुकसान हो रहा है! लेकिन इसके बावजूद भी जिला प्रशासन वन विभाग अधिकारी जनप्रतिनिधि उतने सचेत नहीं है जितना कि उन्हें होना चाहिए! !
मेरा अनुमान है कि जिस रफ्तार से गुलदारों की संख्या जनपद में बढ़ रही है वह अगले एक-दो साल में हजारों की संख्या में पहुंचकर बिजनौर शहर में एवं आसपास के कस्बों में भी दिखाई देंगे! वन विभाग के आंकड़े अनुसार गुलदारौ की संख्या वर्तमान में 500 है और मेरा मानना है एक गुलदारानी साल में दो बार बियाती है एक बार में दो से तीन शावक देती है तो अगर इस हिसाब से हिसाब लगे तो गुलदार की संख्या करीब 3000 पहुंचेगी जो नियंत्रण से बाहर एवं खतरे के अंतर्गत हो जाएगी साथ ही ,मैं सरकार का यहां भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि गुलदार से हमले में करने वालों को ₹500000 मुआवजा सरकार देती है जो कि देखा जाए तो एक एक्सीडेंट क्लेम में घायल व्यक्ति को 5 लाख का मुआवजा मिलता है और गुलदार के हमले से हुई आकस्मिक अकाल मृत्यु उसमें जवान बच्चे, बूढ़े, महिला सब चपेट में आए हैं जिसे देखा जाए तो मुआवजे की संख्या 1 करोड रुपए भी काम है क्योंकि यह गुलदार के शावक हमारे केंद्र सरकार की ही देन है केंद्र सरकार के द्वारा ही छुड़वाए गए थे! ! गुलदार की विशेषता यह है कि यह संपूर्ण मांसाहारी है जिससे कि उसे सिर्फ मांस के कुछ नहीं दिखता चाहे वह इंसान का हो चाहे जंगली जानवर का !!

मेरा प्रशासन से जनप्रीनिधि से एवं वन विभाग अधिकारी से यह अनुरोध है कि बिजनौर जनपद को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने का कष्ट करें एवं इस समस्या को अपने व्यक्तिगत रूप से देखकर जनपद को निजात दिलाई जाए मैं भी एक किसान हूं मेरा गांव गडऻना है वहां के लोगों ने भी मुझसे कई बार इस गंभीर समस्या के बारे में बताया तो मैंने आज प्रेस के माध्यम से अपना यह तर्क विषय के रूप में रखने के साथ प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहा ,मेरे गांव के कुछ किसान गुलदार के डर से अपने खेत पर भी नहीं जा रहे हैं।।

एमपी सिंह( से० नि०) पुलिस उपाधीक्षक
निवास गीता नगरी बिजनौर

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