नई दिल्ली । संसद में सरकार का बयान हाल ही में, भारत सरकार ने संसद में पुष्टि की है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट समेत कई प्रमुख हवाई अड्डों के पास उड़ानों के GPS डेटा में छेड़छाड़ (GPS स्पूफिंग) और GNSS हस्तक्षेप की घटनाएं दर्ज की गई हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सोमवार (1 दिसंबर 2025) को लोकसभा में यह जानकारी दी।
प्रभावित एयरपोर्ट्स और घटनाओं का विवरण
प्रभाव: GPS-आधारित लैंडिंग प्रक्रियाओं (जैसे रनवे 10 पर) प्रभावित हुईं, जिससे पायलटों को गलत नेविगेशन डेटा मिला। हालांकि, पारंपरिक ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन सिस्टम वाले रनवे पर कोई असर नहीं पड़ा। नवंबर 2025 में दिल्ली में एक घटना से 800 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं, जिसके कारण डायवर्जन और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं हुईं। कुल मिलाकर, नवंबर 2023 से फरवरी 2025 तक लगभग 465 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं।
संभावित कारण
सरकार ने स्पष्ट रूप से कारण नहीं बताया, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्राउंड-बेस्ड फेक सिग्नल्स से हो सकता है जो सैटेलाइट डेटा को ओवरराइड कर देते हैं। इससे विमान की स्थिति में अचानक बदलाव (जैसे 335 किमी तक का फ्लक्चुएशन) आ जाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और उपाय
रिपोर्टिंग अनिवार्य: नवंबर 2023 से डीजीसीए (DGCA) ने GPS जम्मिंग या स्पूफिंग की सभी घटनाओं की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। अब पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को 10 मिनट के अंदर रीयल-टाइम रिपोर्ट देनी होती है। निगरानी: मिनिमम ऑपरेटिंग नेटवर्क (MON) को वैश्विक मानकों के अनुसार बनाए रखा गया है, जिसमें पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं। जांच: NSA अजीत डoval के कार्यालय ने नवंबर 2025 की दिल्ली घटना की जांच शुरू की है। सरकार ने साइबर अटैक की आशंका को खारिज किया है, लेकिन हाई-लेवल उपाय तैनात किए गए हैं।







