हर रोज बंद हो रहे 25 स्कूल, दस साल में बंद कर दिए गए 94 हजार स्कूल!
चिंताजनक है शिक्षा व्यवस्था पर आई नीति आयोग की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट के आदेश को धता बताकर किया गया शिक्षा व्यवस्था का कबाड़ा
2015 में हाई कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने दिया था सरकारी सुविधाएं लेने वाले व्यक्ति के बच्चों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के अनिवार्यता का आदेश
चरण सिंह
क्या शिक्षा के इस व्यवसायीकरण दौर में आम आदमी अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या और दूसरे उच्च पदों पर बैठा सकता है ? ऊपर से पर्चे लीक। ये जो पर्चे लीक होते हैं ये कोई आम आदमी तो खरीद नहीं सकता न । संपन्न परिवार के बच्चे ही ये पर्चे खरीदते होंगे। वैसे सब सरकारें गरीब हितैषी बताती हैं। इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश में शराब के ठेकों, धर्मस्थलों, क्लबों की भरमार हो रही ही पर शिक्षा के मंदिरों को बंद किया जा रहा है।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल कम हुए हैं। इस रिपोर्ट ने सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की कई सारी कमियों को गिनाया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट ‘School Education in India: A Temporal Analysis’ में देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं।
सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घटी है
रिपोर्ट के अनसुार, पिछले 10 सालों में भारत के हर दिन 25 (एवरेज डाटा) स्कूल बंद हुए हैं। बंद होने वाले स्कूलों में सबसे ज्यादा सरकारी स्कूल हैं। पिछले 10 वर्षों में देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख से घटकर 10.13 लाख रह गई है।
प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है
एक तरफ सरकारी स्कूलों की संख्या घटी है तो दूसरी ओर प्राइवेट स्कूलों की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2014-15 में इनकी संख्या 2.88 लाख (19%) थी, जो 2024-25 में बढ़कर 3.39 लाख (23%) हो गई। साफ है कि 10 सालों में प्राइवेट (निजी) स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गई है. स्टूडेंट्स सरकारी स्कूल को छोड़कर प्राइवेट की तरफ जा रहे हैं। सरकारी सहायता प्राप्त (Government-Aided) स्कूलों की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही है और यह 5.5% से घटकर 5.4% पर पहुंच गई है।
हर साल 11.5% छात्र छोड़ रहे हैं स्कूल
रिपोर्ट में छात्रों के प्राथमिक शिक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के ट्रेंड को लेकर भी चिंता जताई गई है। जारी आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) में ड्रॉपआउट रेट सिर्फ 0.3% है। हालांकि, अपर प्राइमरी (कक्षा 6 से 8) में यह बढ़कर 3.5% हो जाती है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) में पहुंचते-पहुंचते ड्रॉपआउट रेट 11.5% तक पहुंच जाती है।







