मुजफ्फरपुर: कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने बुधवार को सहायक विद्युत अभियंता कार्यालय तिलक मैदान में धरना-प्रदर्शन के दौरान भाजपा-जदयू सरकार पर स्मार्ट मीटर के जरिए उद्योगपतियों से मिलीभगत कर बिहार की जनता की जेब पर डाका डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केरल जैसे शत-प्रतिशत साक्षर राज्य में सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई है। महाराष्ट्र में भी शिवसेना-भाजपा सरकार ने इसे रोक दिया है, जबकि गुजरात, जो प्रधानमंत्री का गृह राज्य है, वहाँ भी स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक है। ऐसे में नीतीश कुमार भाजपा के साथ मिलकर बिहार की जनता के साथ इस तरह का खेल क्यों खेल रहे हैं?
कांग्रेस के कृपाशंकर शाही ने कहा कि जिस राज्य की 65 प्रतिशत जनता के पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है, वहां स्मार्ट मीटर लगाना हास्यास्पद है। सूरज दास ने बताया कि स्मार्ट मीटर के जरिए अनावश्यक बिल भेजे जा रहे हैं और बिल संबंधी जानकारी फोन पर देने के बजाय लोगों को जिला विद्युत कार्यालय बुलाया जाता है, जो आम लोगों के लिए संभव नहीं है।
सुरेश शर्मा नीरज ने कहा कि बिहार की जनता अभी डिजिटली स्मार्ट नहीं हुई है और सरकार इस कमजोरी का फायदा उठाकर उनकी जेब पर डाका डाल रही है। कांग्रेस जिलाप्रवक्ता समीर कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना जनता की स्वेच्छा पर निर्भर होना चाहिए। जिलाधिकारी द्वारा एफआईआर का भय दिखाकर जबरन स्मार्ट मीटर लगाना जनता की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार स्मार्ट मीटर वापस नहीं लेती, तो कांग्रेस राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लेगी। इस धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के लोकक्रांति यादव, महताब आलम सिद्दीकी, निशारुद्दीन छोटे, केदार सिंह पटेल, विजय यादव समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।

