गाजियाबाद के कविनगर में यूपी एसटीएफ ने एक फर्जी दूतावास का भंडाफोड़ किया, जो वेस्ट आर्कटिका जैसे काल्पनिक देशों के नाम पर चल रहा था। आरोपी हर्षवर्धन जैन, जो खुद को इन देशों का “राजदूत” बताता था, को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट वाली 12 गाड़ियां, विदेश मंत्रालय की फर्जी मुहर वाले दस्तावेज, और पासपोर्ट बरामद हुए। यह फर्जी दूतावास एक आलीशान कोठी से संचालित था, और जैन के तंत्रगुरु चंद्रास्वामी और हथियार डीलर खगोशी से संबंध होने की बात सामने आई है।
यह घटना भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से जुड़ी नहीं है, बल्कि एक आपराधिक गतिविधि है, जिसमें मंत्रालय की मुहर का दुरुपयोग किया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संचालन करता है, और इस तरह के फर्जीवाड़े से इसका कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। क्या आप इस मामले के किसी खास पहलू, जैसे फर्जी दस्तावेजों के कानूनी परिणाम या दूतावासों की कार्यप्रणाली, के बारे में और जानना चाहेंगे?

