नेपाल में Gen-Z आंदोलन: नई सरकार के गठन का प्लान और नेताओं पर सख्ती की मांग

नेपाल में सितंबर 2025 से चल रहे Gen-Z (जनरेशन Z) के नेतृत्व वाले बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को हिला दिया है। यह आंदोलन शुरू में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स) पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और नेताओं की लूट के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गया। 8-9 सितंबर को प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई के दौरान कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए, जिसके बाद प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। अब Gen-Z ग्रुप ने नई सरकार के गठन और संचालन का एक स्पष्ट ब्लूप्रिंट (ड्राफ्ट) जारी किया है, जिसमें भ्रष्ट नेताओं को भागने से रोकने और उन्हें सजा दिलाने पर जोर दिया गया है। आइए, इसकी प्रमुख बातें समझते हैं।

 

आंदोलन का बैकग्राउंड

 

ट्रिगर: सरकार ने फेक न्यूज के बहाने सोशल मीडिया पर बैन लगाया, जो युवाओं के लिए आवाज उठाने का मुख्य माध्यम था। Gen-Z ने इसे भ्रष्टाचार छिपाने की साजिश माना। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और मंत्रियों के घरों पर हमला किया, कई जगह आगजनी की।
मुख्य मांगें: भ्रष्टाचार की जांच, नौकरियों में पारदर्शिता, और राजनीतिक सुधार। आंदोलन ने 3 दशक पुरानी लूट की जांच और संविधान में बदलाव की मांग की। काठमांडू मेयर बालेन शाह जैसे युवा नेता भी इसमें शामिल हुए, जिन्होंने Gen-Z को धैर्य रखने और स्थायी बदलाव पर फोकस करने की सलाह दी।
परिणाम: ओली सरकार गिर गई, सेना ने सड़कों पर कंट्रोल लिया, और कर्फ्यू लगाया गया। भारत सरकार ने भी नेपाली यात्रा पर सलाह जारी की।

 

Gen-Z ग्रुप का नई सरकार गठन प्लान

 

Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने 10 सितंबर को एक ड्राफ्ट जारी किया, जिसमें अंतरिम सरकार के गठन और उसके संचालन का रोडमैप दिया गया है। उनका कहना है कि “हमारी पीढ़ी एक नए नेपाल की पक्षधर है—ईमानदारी, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर आधारित।” प्रमुख बिंदु:

 

 

प्लान का हिस्सा विवरण

 

अंतरिम सरकार का गठन राष्ट्रपति के नेतृत्व में तुरंत अंतरिम सरकार बनाई जाए। इसका मुख्य लक्ष्य नए आम चुनाव कराना है, न कि लंबे समय तक शासन। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम पीएम के रूप में प्रस्तावित किया गया। संसद भंग करने की मांग।
नेपाली सेना की भूमिका सेना केवल सुरक्षा, स्थिरता और निष्पक्ष निगरानी तक सीमित रहे। चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप न करे।
चुनाव और संवैधानिक बदलाव दो महीने में नया संविधान तैयार हो। हिंदू राष्ट्र की घोषणा, प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यपालिका, प्रधानमंत्री पद पर दो बार की सीमा। प्रांतों को खत्म करने की मांग।
भ्रष्टाचार पर सख्ती भ्रष्ट नेताओं (जैसे ओली और अन्य) को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए तुरंत गिरफ्तारी। 3 दशक की लूट की स्वतंत्र जांच। नरसंहार (प्रदर्शन में मौतों) के लिए जिम्मेदार नेताओं को सजा।
अन्य सुधार नौकरियों में युवाओं को प्राथमिकता, सोशल मीडिया बैन हटाना, और सिस्टम में बड़ा बदलाव। स्थायी समाधान पर जोर, जल्दबाजी से बचना।

Gen-Z का मानना है कि यह प्लान नेपाल को “नए जनादेश” देगा। काठमांडू मेयर बालेन शाह ने कहा, “इस ऐतिहासिक परिवर्तन को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम सरकार जरूरी है। जो तुरंत नेतृत्व चाहते हैं, वे स्थायी समाधान पर ध्यान दें।”

 

आगे क्या?

 

वर्तमान स्थिति: सेना सड़कों पर है, लेकिन प्रदर्शन थमे नहीं। भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेना अभी प्रभावी रूप से सत्ता संभाल रही है, लेकिन Gen-Z की मांगें पूरी न होने पर अस्थिरता बढ़ सकती है।
Gen-Z की ताकत: यह पीढ़ी (1997-2012 के बीच जन्मे) डिजिटल युग की है, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ी हुई है। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ “जनरेशनल रेकनिंग” कर रहे हैं। दुनिया भर में Gen-Z के आंदोलन (जैसे हॉन्गकॉन्ग, अमेरिका) इसी तरह सफल हुए हैं। यह आंदोलन नेपाल के लिए एक टर्निंग पॉइंट हो सकता है, लेकिन हिंसा से बचना चुनौती है। अपडेट्स के लिए न्यूज स्रोतों पर नजर रखें।

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