फ्री राशन से ज्यादा जरूरी है फ्री शिक्षा और चिकित्सा योजना

चरण सिंह राजपूत 

त्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जीतते ही फिर से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ ने फ्री राशन योजना को तीन महीने के लिए बढ़ाया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह महीने के लिए बढ़ा दिया। यह देश के हालात हैं या फिर वोटबैंक की राजनीति कि फ्री राशन योजना देश की सबसे महत्वपूर्ण योजना बन चुकी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि देश में ऐसी कौन से क्षेत्र हैं जहां पर फ्री सुविधाएं मिलनी चाहिए। जिस तरह से देश में शिक्षा और चिकित्सा माफिया की भरमार हुई है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि समाजसेवा के नाम से जाने जाने वाले ये दोनों पेशों में सुधार की सबसे अधिक आवश्यकता है। विशुद्ध रूप से धंधा बन चुकी शिक्षा और चिकित्सा लोगों के वहन करने के दायरे से बाहर होती जा रही हैं। जिस तरह से मिलावटी खाद्यान्न और रहन-सहन में आये बदलाव के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। स्वास्थ्य बीमा कंपनियां लोगों को ठग रही हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी शिक्षण संस्थानों के बंद होने और निजी शिक्षण संस्थानों के कुकुरमुत्तों की तरह उगने से लोगों का अपने बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में देश में यदि किसी क्षेत्र में फ्री सुविधा देने की सबसे ज्यादा जरूरत है वह शिक्षा और चिकित्सा हैं। वैसे भी कई देशों ने शिक्षा और चिकित्सा फ्री कर रखी है। होना यह चाहिए कि सरकारें सरकारी स्कूलों के साथ ही अस्पतालों में भी फ्री सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों के साथ ही अस्पतालों को भी अपने अधीन कर सरकारी अस्पतालों वाली सुविधाएं बहाल कराएं। अक्सर देखा जाता है कि बड़े स्तर पर ऐसे लोग शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में हैं, जिनको इस क्षेत्र की बहुत कुछ जानकारी नहीं है। मतलब इन लोगों को किसी के करियर या फिर किसी के स्वास्थ्य से कोई मतलब नहीं है। बस धंधा करना है। यदि ये संस्थाएं सरकारों के अधीन होंगी तो न केवल लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा सकेगा बल्कि लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने में सुविधा भी मिलेगी। मतलब अच्छा स्वास्थ्य और प्रतिभाशाली बच्चे देश और समाज को विकास के रास्ते पर दौड़ाएंगे।
दुनिया के कई देशों में मिलती हैं फ्री सुविधाएं : शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा, पेंशन के साथ बहुत कुछ
दुनियाभर में कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को बेहतर जीवन देने के लिए फ्री सुविधाएं देती हैं। दुनियाभर में कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को बेहतर जीवन देने के लिए फ्री सुविधाएं देती हैं।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, डेनमार्क और जर्मनी जैसे कई देश हैं, जहां पर उच्च शिक्षा का खर्च तकरीबन न के बराबर है। इसके अलावा चेक रिपब्लिक, इटली, फ्रांस, स्पेन और ग्रीस जैसे देशों में सरकारी यूनिवर्सिटीज में उच्च शिक्षा तकरीबन मुफ्त है। इन देशों की सरकारी यूनिवर्सिटीज में प्रशासनिक खर्च के नाम पर कुछ फीस ली जाती है लेकिन वो बेहद कम है।
स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी समेत स्कैंडिविनियाई देशों की तकरीबन सभी यूनिवर्सिटी में शिक्षा व्यवस्था मुफ्त है। यूरोपीय स्कैंडिविनियाई देशों में भी ऐसा ही है। फिनलैंड में तो शिक्षा बिल्कुल मुफ्त है। यहां पर स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक खर्च वहन सरकारें ही करती हैं। यहां पर नागरिकों और गैर नागरिकों सभी के लिए पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स में पढ़ाई के पैसे नहीं लगते। पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टोरल स्तर की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। यहां के उच्च शिक्षा सिस्टम को दुनिया के सबसे बेहतरीन सिस्टम में से एक माना जाता है। यहां पर स्कूली स्तर की पढ़ाई भी बेहतरीन है। 2017 में इंडिया टुडे मैगजीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन देशों की लिस्ट में है जो अपने यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर सबसे कम खर्च करते हैं, स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होने के मामले में भारत 195 देशों में 154वीं पायदान पर है। स्वास्थ्य के मामले में हमारे देश के हालात बांग्लादेश, नेपाल, घाना और लाइबेरिया से भी बदतर हैं। अगर फ्री स्वास्थ्य सेवाओं की बात की जाएं तो दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जो अपने नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं। और तो और फिदेल कास्त्रो द्वारा क्यूबा में शुरू की गईं फ्री स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दुनियाभर में तारीफ की जाती है।
दुनिया के विकसित देशों से लेकर विकासशील देशों तक कई ऐसे हैं, जो अपने यहां नागरिकों को फ्री हेल्थ सर्विस मुहैया कराते हैं। इजरायल, जापान जैसे देशों में नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल मुफ्त हैं। इसके अलावा अगर यूरोप की बात की जाए तो मोटे तौर पर तकरीबन पूरे उपमहाद्वीप के देशों में हेल्थकेयर की सुविधा या तो मुफ्त है या फिर नागरिक पूरी तरह से एन्श्योर्ड हैं। संपूर्ण मुफ्त स्वास्थ्य सेवा वाले देशों में ऑस्ट्रिया, बेलारूस, क्रोएशिया, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन कई देश शामिल हैं।

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