ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने अमेरिकी किसानों को फँसा दिया: चीन, रूस, ब्राजील और भारत ने बाजार बदल लिया

ट्रंप प्रशासन के आक्रामक टैरिफ नीतियों ने अमेरिकी कृषि क्षेत्र को गहरी चोट पहुँचाई है, खासकर मक्का (कॉर्न) और सोयाबीन के निर्यात पर। 2025 में लागू हुए भारी टैरिफ (चीन पर 100-145%, भारत और ब्राजील पर 50% तक) के जवाब में चीन ने अमेरिकी सोयाबीन और मक्का की खरीद पूरी तरह बंद कर दी है। इसके बजाय, चीन ने ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों पर निर्भरता बढ़ा ली है। रूस और भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क लगाए रखे हैं या खरीदारी को सीमित किया है, जिससे अमेरिकी किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये देश “मिलकर पलटी मार” रहे हैं, क्योंकि ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक व्यापार को फिर से आकार दे दिया है।

सोयाबीन का संकट: 2024 में चीन ने अमेरिका से $12.5 बिलियन मूल्य के सोयाबीन खरीदे थे, जो अमेरिकी सोयाबीन निर्यात का आधा से अधिक हिस्सा था। लेकिन मई 2025 से चीन ने कोई खरीदारी नहीं की। कुल निर्यात 2025 के पहले सात महीनों में 53% गिर गया। किसान अब स्टोरेज की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि बंपर फसल (रिकॉर्ड स्तर की) के लिए बाजार नहीं मिल रहा।
मक्का का हाल: अमेरिकी मक्का निर्यात भी चीन पर निर्भर था (2022 में $5.2 बिलियन), लेकिन 2024 में यह घटकर $33 मिलियन रह गया। चीन ने ब्राजील से आयात बढ़ा लिया, जबकि भारत ने जीएमओ (जेनेटिकली मॉडिफाइड) मक्का पर आयात प्रतिबंध लगाए रखा।
कुल नुकसान: अमेरिकी कृषि निर्यात में $26 बिलियन का घाटा, किसान दिवालिया होने के मामले 55% बढ़े। आर्कांसस जैसे राज्यों के किसान कह रहे हैं, “हमारी 40% फसल निर्यात पर निर्भर है, लेकिन अब $12 बिलियन से शून्य हो गया।”

चीन, रूस, ब्राजील और भारत की “पलटी बाजी” कैसे हुई?
ये चारों देश BRICS सदस्य हैं और ट्रंप के टैरिफ को “आर्थिक जबरदस्ती” मानते हुए एकजुट हो गए। उन्होंने अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम कर ली:

चीन: मुख्य खरीदार था, लेकिन अब ब्राजील से 71-90% सोयाबीन और मक्का ले रहा है। 34% जवाबी टैरिफ लगाए, और “मेड इन चाइना 2025” योजना से स्वदेशी उत्पादन बढ़ाया। विशेषज्ञ कहते हैं, “चीन अब अमेरिका को ‘अनिश्चित साझेदार’ मानता है।”
ब्राजील: ट्रंप के 50% टैरिफ (बोल्सोनारो मामले पर) के बावजूद फायदा उठाया। चीन को $36.6 बिलियन सोयाबीन बेचा (अमेरिका के $12.1 बिलियन के मुकाबले)। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्राजील को समर्थन दिया।
भारत: रूस से तेल खरीदने पर 50% टैरिफ झेला, लेकिन अमेरिकी मक्का-सोयाबीन पर 45-60% शुल्क लगाए। जीएमओ प्रतिबंध के कारण “एक बुशेल भी नहीं खरीदते।” वाणिज्य मंत्री ने कहा, “हमारे किसानों की रक्षा पहले।” ट्रंप भारत को बेचने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन भारत ब्राजील-रूस से आयात बढ़ा रहा।
रूस: ट्रंप के दबाव के बावजूद भारत-चीन को सस्ता तेल बेच रहा। अमेरिकी अनाज पर उच्च टैरिफ, और खुद गेहूँ-मक्का निर्यात बढ़ाया।

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