पंजाब में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने प्रवासी मजदूरों, खासकर बिहार से आए मजदूरों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। बाढ़ के कारण 1,902 गांव जलमग्न हो गए और 1.71 लाख हेक्टेयर में फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे धान की रोपाई और कटाई का काम ठप हो गया। बिहार से पंजाब में धान के काम के लिए आने वाले मजदूर अब बेसहारा होकर हरियाणा और दिल्ली की ओर पलायन कर रहे हैं, जहां उन्हें काम की तलाश है।
सहरसा जंक्शन जैसे रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों की भीड़ देखी जा रही है, जो दिल्ली और हरियाणा जाने वाली ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी रोजी-रोटी छीन ली, और अब परिवार चलाने के लिए उन्हें नए ठिकानों की तलाश करनी पड़ रही है। उदाहरण के लिए, अशोक और अरविंद जैसे मजदूरों ने बताया कि खेतों में पानी भरने से कटाई का काम शुरू नहीं हो सका, जिसके कारण वे हरियाणा या दिल्ली में काम की उम्मीद में जा रहे हैं।
यह पलायन बिहार में पहले से मौजूद गरीबी और बेरोजगारी की समस्या को और गहरा रहा है, जहां से लोग रोजगार के लिए अन्य राज्यों की ओर रुख करते हैं। इस संकट ने न केवल मजदूरों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि पंजाब के कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे स्थानीय और प्रवासी दोनों समुदाय प्रभावित हुए हैं।

