उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला क्षेत्र में जिला परिषद विद्यालय के प्लेग्राउंड में 100 साल से आयोजित हो रही पारंपरिक रामलीला पर रोक लगाने की मांग को लेकर उठा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर संज्ञान लेते हुए रामलीला कार्यक्रम को तत्काल बंद करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ रामलीला आयोजन समिति ने शीर्ष अदालत में अपील की।
मुख्य तथ्य:
विवाद की शुरुआत: एक याचिकाकर्ता ने स्कूल के ग्राउंड पर रामलीला आयोजन से छात्रों की पढ़ाई और खेलकूद गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट ने बिना पूरी सुनवाई के एकपक्षीय आदेश जारी कर कार्यक्रम रोक दिया, जिससे स्थानीय हिंदू संगठन और दर्शक नाराज हो गए।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 24 सितंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। कोर्ट ने कहा कि त्योहार की तैयारियां पहले से चल रही हैं, इसलिए इस बार रामलीला जारी रह सकती है। साथ ही, कोर्ट ने टिप्पणी की, “वहां 100 साल से हो रही रामलीला…” जो परंपरा के महत्व को रेखांकित करती है। भविष्य के लिए निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह जिला प्रशासन पर दबाव डाले ताकि रामलीला जैसे आयोजनों के लिए कोई वैकल्पिक स्थल चिन्हित किया जाए। इससे स्कूल ग्राउंड का उपयोग केवल छात्रों के लिए सुनिश्चित हो सके। कोर्ट ने यूपी सरकार, जिला प्रशासन और हाईकोर्ट में मूल याचिकाकर्ता को नोटिस भी जारी किया है।
यह फैसला रामलीला की सांस्कृतिक परंपरा और शैक्षणिक संस्थानों के उपयोग के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक कदम है। मामले की अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।







