आंदोलनकारियों पर हमलावर गुंडों से भी लिया जाएगा मोर्चा
संयुक्त किसान मोर्चा के ऐलान – 23 को देशभर के जिला और तहसील मुख्यालयों पर होगा प्रदर्शन
26 नवम्बर को 2020 के आंदोलन की तर्ज पर छेड़ा जाएगा आंदोलन
चरण सिंह
पहले नीट परीक्षा में पर्चे लीक होने के खिलाफ दिल्ली जंतर मंतर पर छात्रों का ऐतिहासिक प्रोटेस्ट के बाद एसआईआर के मुद्दे पर देश में बड़ा आंदोलन खड़ा हो चुका है। छात्रों, वकीलों और विपक्ष के बाद अब संयुक्त किसान मोर्चे ने मोर्चा भी संभाल लिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलनकारियों पर हमलावर गुंडों के खिलाफ मोर्चा लेने और 23 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। 26 नवम्बर से 2020 के आंदोलन की तर्ज पर देशभर में बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। यह निर्णय करनाल में हुई संयुक्त किसान मोर्चे की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक में लिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के मैदान में कूदने पर अब मोदी सरकार के लिए बड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।

दरअसल जिस समय मोदी सरकार किसी संगठन को सड़कों पर नहीं उतरने दे रही थी। सरकार के खिलाफ बोलने से लोग डरते थे। उस समय संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 3 कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसानों ने डेरा डाल दिया था। 26 नवम्बर 2020 से शुरू होकर 13 महीने चले इस आंदोलन में भले ही 700 किसानों की शहादत हुई पर किसानों ने हार नहीं मानी। सरकार ने किसानों को नक्सली, नकली किसान न जाने क्या क्या कहा। दमन का रास्ता अपनाकर आंदोलन को कुचलने की पूरी कोशिश की। वह किसान संगठनों की एकजुटता और संघर्ष ही था कि अंतत मोदी सरकार को हार माननी पड़ी। 13 महीने बाद पीएम मोदी ने किसानों से माफ़ी मांगते हुए वे तीनों कृषि कानून वापस लिए लिए। मतलब मोदी सरकार को पहली बार किसानों ने ही झुकने को मजबूर किया गया थ । अब शिक्षा व्यवस्था पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर युवाओं ने झुकाया है।

एसआईआर के मुद्दे पर अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका की अगुआई में सीजेपी तो राहुल गांधी की अगुआई में विपक्ष और कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण की अगुआई में वकीलों ने मोर्चा संभाल लिया है। काफी वकील तो सुप्रीम कोर्ट में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। जेन एल्फा अलग से मोर्चा संभाले हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा 23 अक्टूबर को SIR के खिलाफ जिला और तहसील मुख्यालयों पर पूरे देश में प्रदर्शन करेगा। दरअसल, 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में एसकेएम की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई है। इस बैठक में आंदोलन को लेकर कई निर्णय लिए गए। वैसे भी भारतीय किसान यूनियन 10 अक्टूबर को भी एसआईआर के खिलाफ बड़ा आंदोलन कर चुकी है। पर्चे लीक होने पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के आंदोलन को भी संयुक्त किसान मोर्चा ने समर्थन दिया था।
दरअसल संयुक्त किसान मोचे में 550 संगठन शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा एक संयुक्त और व्यापक राष्ट्रीय गठबंधन है। एसकेएम में अखिल भारतीय स्तर पर तथा विभिन्न राज्यों (विशेषकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि) के प्रमुख संगठन शामिल हैं। मुख्य रूप से अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न संगठन जैसे- भाकियू टिकैत, भाकियू उग्राहां, भाकियू डाकूंदा, भाकियू दोआबा, भाकियू लक्खोवाल, क्रांतिकारी किसान यूनियन, जम्हूरी किसान सभा, कुल हिंद किसान महासंघ, स्वराज इंडिया, किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान महासभा, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा, जय किसान आंदोलन, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन, इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन आदि हैं।







