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नगर सरकार गठन के साल भर बाद भी नगर परिषद के सभी वार्डों में नहीं होती है डोर टू डोर कचरा कलेक्शन

नप के सभी वार्डों में नहीं होती है डोर टू डोर कचरा कलेक्शन

 केवल 16 वार्डों में ही कचरा कलेक्शन के लिए होता है बार बार सर्वेक्षण

राम विलास
राजगीर। पर्यटक शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का हाल खास्ता है। नगर परिषद, राजगीर में कुल 32 वार्ड हैं। लेकिन यहां कचरा कलेक्शन करने वालों की संख्या मात्र 55 है। यानि एक वार्ड में उनकी संख्या दो भी नहीं होती है। सूत्रों की माने तो नगर के 32 वार्डों में से केवल 16 वार्ड में ही डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कराया जाता है।

शेष 16 वार्ड में कचरा कलेक्शन का काम भगवान भरोसे है। पहले हरी रंग की साड़ी में महिलाएं सीटी बजाकर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करती थी। अब वैसी बात नहीं है। न उनके शरीर पर हरी रंग की साड़ी और न ही हाथ में भिसील होती है। जानकार बताते हैं कि नगर परिषद की सरकार बने एक साल से अधिक हो गये हैं। लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है।

शहर के वार्डों की सफाई व्यवस्था आउटसोर्सिंग के हवाले कर दिया गया है। शहर के वार्डों की संख्या बढ़ गयी है, लेकिन डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कर्मियों की संख्या पहले की तरह ही 55 की 55 है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वालों की संख्या नहीं बढ़ने के कारण सभी वार्डों में कचरा कलेक्शन नहीं होता है।

इतना ही नहीं जिन 16 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं होता है वहां के घरों में डस्टबीन का वितरण भी अबतक नहीं किया गया है। जिन 16 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। वहां के भी सभी घरों को डस्टबीन नहीं दिया गया है। वार्ड 25 में सोमवार को फिर से सर्वे शुरू किया गया । है। महिला कर्मी घर घर जा कर पता कर रही है कि किन किन घरों में डस्टबीन है या नहीं है।

डस्टबीन नहीं है तो उन घरों के मुखिया का नाम नोट कर रही है। वह बताती है कि यह सर्वे रिपोर्ट नगर परिषद को सौंपी जायेगी। नगर परिषद द्वारा उन घरों में डस्टबीन की आपूर्ति की जायेगी। जिन घरों में डस्टबीन की आपूर्ति नगर परिषद द्वारा की जायेगी। उन घरों से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जायेगा। उसके एवज में नगर परिषद द्वारा निर्धारित शुल्क की वसुली की जायेगी।

जानकार बताते हैं कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम वर्षों पूर्व आरंभ किया गया है। लेकिन अभी तक डस्टबीन वितरण और कचरा कलेक्शन के लिए सर्वे ही कराये जा रहे हैं।नगर परिषद अपनी नाकामी को छिपाने के लिए कभी कभी इस तरह की सर्वे कराती रहती है। स्थानीय लोगों की माने तो अबतक नगर परिषद के सभी वार्डों के घरों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किस परिस्थिति में नहीं करायी जा रही है।

इसकी जिला स्तरीय टीम से जांच होनी चाहिये। नगर सरकार के गठन के एक साल बाद भी विकास नहीं होना और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं होना आश्चर्य जैसा लगता है।

 पहले की तरह अब ड्रेस नहीं मिलता है

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली महिलाएं बताती हैं कि अब उन्हें ड्रेस नहीं दिया जाता है। पहले नगर परिषद द्वारा हरी रंग की साड़ी ड्रेस में दी जाती थी। तब ड्रेस से ही लोग समझ जाते थे कि कचरा कलेक्शन वाली आ गयी है। अब ड्रेस नहीं दिया जाता है।

अपने घर की कपड़े में ही कचरा कलेक्शन घर घर जाकर करती है। वह बताती हैं कि कचरा कलेक्शन करने के लिए उनलोगों का वार्ड बांट दिया गया है। अपने क्षेत्र के जिन घरों को डस्टबीन दिया गया है वहीं से वह सब कचरा कलेक्शन करती हैं।

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