नृपेंद्र मिश्रा पर नहीं मोदी और अमित शाह पर है चंपत राय का हमला
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में क्लीन चिट मिलते ही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष पर हमलावर हुए हैं चंपत राय
मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए बीजेपी में चल रहा बड़ा घमासान
पीएम मोदी अमित शाह तो मोहन भागवत बनाना चाहते हैं योगी आदित्यनाथ को
चरण सिंह
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बीच राम मंदिर चंदा चोरी का उभरा विवाद बीजेपी में बड़ा बवाल लेकर आने वाला है। यह विवाद चंपत राय-नृपेंद्र मिश्रा के बीच नहीं बल्कि आरएसएस नेतृत्व और बीजेपी नेतृत्व के बीच में है। यह भी कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह के बीच वर्चस्व की लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा है।
बताया जा रहा है कि राम मंदिर चंदा चोरी का मामला किसी ओर ने नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने आरएसएस और योगी आदित्यनाथ को डाउन करने के लिए उभारा है। ऐसे ही नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर चंदा चोरी के मामले को डकैती करार दिया था। मोदी सरकार बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब मेन स्ट्रीम मीडिया ने राम मंदिर चंदा चोरी के मामले को प्रमुखता से चलाया और डिबेट भी कराई। इसके पीछे अमित शाह का हाथ बताया जा रहा था। दिल्ली जंतर मंतर पर सीजेपी का आंदोलन मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ी राहत लेकर आया था। इसी बीच में योगी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचा लिया।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब राम मंदिर निर्माण और रखरखाव के लिए जब कमेटी बनी तो खुद प्रधानमंत्री की निगरानी में बनी। राम मंदिर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री के करीबी नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गए तो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बनाया गया। अब जब एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है तो चंपत राय खुलकर सामने आ गए हैं।
उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते नौ पन्नो का एक पत्र लिख दिया है। देखने की बात यह है कि नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर चंदा चोरी को डकैती का नाम दिया था। नरेंद्र मिश्रा वही आईएएस हैं जिनके मुख्य सचिव रहते हुए कार सेवकों पर गोली चलवाई गई थी।
दरअसल बीजेपी में अब मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद की लड़ाई चल रही है। प्रधानमंत्री अपने सारथी अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं तो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को। यही वजह है की राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में अमित शाह ने मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ को उलझा दिया था। योगी आदित्यनाथ ने अपनी एसआईटी से आरएसएस में करीबी चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचा लिया। अब आरएसएस ने नृपेंद्र मिश्रा के माध्यम से पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर चंपत राय पर हमला कराया है।
दरअसल अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बीच विवाद की मुख्य वजह मंदिर निर्माण के फैसलों में कथित मनमानी और अधिकार क्षेत्र को लेकर है। यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब चंपत राय को मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के आरोपों में एसआईटी (SIT) से क्लीन चिट मिल गई। इसके तुरंत बाद चंपत राय ने एक 9 पन्नों का बयान (चिट्ठी) जारी किया, जिसमें 33 बिंदुओं के जरिए नृपेंद्र मिश्रा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए।
इस तनातनी के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:चंपत राय के मुख्य आरोपी एकतरफा फैसले और मनमानी: चंपत राय का आरोप है कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने निर्माण से जुड़े प्रमुख फैसलों में अपनी मनमानी की। समिति के अन्य सदस्यों या अधिकारियों के सुझावों को तरजीह नहीं दी गई या उनके फैसलों को बदल दिया गया।पसंदीदा नियुक्तियां: चिट्ठी में आरोप लगाया गया कि नृपेंद्र मिश्रा ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों और कंपनियों को जोड़ा। इनमें से कुछ लोग पिछले 6 सालों में सिर्फ एक या दो बार ही अयोध्या आए। उन्होंने कहा कि एलएंडटी (L&T) और अन्य फर्मों का चयन नृपेंद्र मिश्रा के सुझावों और दखल के आधार पर ही हुआ था।
नृपेंद्र मिश्रा का पलटवार आरोपों को नकारा: इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने साफ कहा कि उन्होंने ऐसी कोई चिट्ठी या पत्र देखा ही नहीं है। उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह से बेबुनियाद और मीडिया की मनगढ़ंत गाथा करार दिया। उन्होंने मीडिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस तरह की बातें उछालकर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम चंपत राय द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने और फिर एसआईटी जांच में बेदाग साबित होने के बाद तेजी से बदला है, जिससे मंदिर प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर आंतरिक मतभेद उजागर हो गए हैं।

