समाज में स्त्री पुरुषों की भूमिका गाड़ी के गतिशील पहियों की तरह परस्पर पूरक
रीवा । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर स्थानीय पाण्डेनटोला वार्ड नंबर 40 गड़रियान मोहल्ला में नारी चेतना मंच के तत्वावधान में आयोजित हुई एक विचार संगोष्ठी में इस बात पर आक्रोश व्यक्त किया गया कि संविधान में महिलाओं को शुरू से बराबरी का दर्जा और मताधिकार मिला हुआ है लेकिन व्यवहार में 66 साल बाद भी उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। आए दिन महिलाओं के साथ होने वाली शर्मनाक बर्बर घटनाएं बताती हैं कि उनकी सुरक्षा का सवाल काफी चिंताजनक है। समतामूलक समाज के लिए अभी लोगों की सोच बदलने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में साल के 364 दिनों तक उपेक्षित नारी के लिए महिला दिवस का आयोजन महज़ रस्म अदायगी नजर आता है। समाज में महिलाओं को दबाकर रखने की सोच बदलनी होगी। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति का शिकार होने से बचना होगा। मौजूदा बाजारवाद में औरत को एक वस्तु की तरह देखा जाता है। दहेज जैसी बुराई से महिलाओं को सबसे अधिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। कड़े कानून बनने के बाद भी बलात्कार थम नहीं रहे हैं। कन्या दान की वस्तु नहीं फिर भी इसे शादी रस्म से नहीं हटाया जा रहा। सामान्य प्रसव की जगह सिजेरियन डिलीवरी महिलाओं के साथ क्रूर खिलवाड़ और आर्थिक लूट है। भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं के साथ होने वाली क्रूरता को अनदेखा किया जाता है वहीं विरोधी दलों की सरकार वाले राज्यों पर केंद्र के द्वारा निशाना साधा जाता है। इस तरह का दोहरा मापदंड बहुत आपत्तिजनक है।
नारी चेतना मंच की अध्यक्ष साक्षी मोटवानी महंत ने एक जानकारी में बताया कि संगठन के संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने दिल्ली प्रवास से रीवा के कार्यक्रम के लिए भेजे गए संदेश में कहा है कि जीवन के हर क्षेत्र में समतामूलक भागीदारी को सुनिश्चित कर आगे बढ़ना संगठन का वैचारिक आधार है। समाज में स्त्री पुरुष की भूमिका गाड़ी के पहियों जैसी है। जिसे समान रूप से गतिशील बनाना होगा। दोनों परस्पर पूरक हैं। किसी को भी कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। मनुष्य के बीच धर्म जाति वर्ग सम्प्रदाय क्षेत्रियता लैंगिकता के आधार पर किसी तरह का विभेद गलत है। नारी चेतना मंच को न्यायिक उद्देश्य के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की आवाज को बुलंद करना है। गाड़ी तभी चलेगी जब उसके सभी पहिए समान रूप से काम करेंगे। समतामूलक समाज का सपना तभी संभव होगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। संगोष्ठी में इतवारिया चंदेल, गीता महंत, साक्षी मोटवानी महंत, नैना चंदेल, ज्योति क्रिवरिया, पूजा चमकेल, प्राची क्रिवरिया आदि की सक्रिय भागीदारी रही।






