आपका सवाल “मतदान से 48 घंटे पहले समीकरण बदल जाएंगे? अपनों के बयान ने बीजेपी को किया परेशान!” काफी सटीक लग रहा है, क्योंकि वर्तमान में महाराष्ट्र की सियासत में ठीक यही माहौल है। आइए देखते हैं क्या चल रहा है:
मुख्य मुद्दे और बीजेपी की मुश्किलें
ठाकरे बंधुओं (उद्धव और राज ठाकरे) की जुगलबंदी: उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) और राज ठाकरे (MNS) ने संयुक्त रैलियां की हैं, जहां उन्होंने मराठी अस्मिता पर जोर दिया। राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासियों को लक्ष्य करते हुए कड़े बयान दिए—जैसे “हिंदी थोपने वालों को लात मारूंगा”। ये बयान मुंबई के बड़े उत्तर भारतीय वोटर बेस को प्रभावित कर सकते हैं और ध्रुवीकरण की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं। इससे बीजेपी-शिंदे शिवसेना गठबंधन (Mahayuti) को नुकसान हो सकता है, क्योंकि मुंबई में प्रवासी वोटर महत्वपूर्ण हैं।
अपनों के बयान से परेशानी: बीजेपी को अपने ही कुछ नेताओं या सहयोगियों के बयानों से झटका लगा है।
पिछले कुछ दिनों में महायुति के अंदर असंतोष की खबरें आई हैं, जैसे कुछ सीटों पर बगावत या विड्रॉल। इसके अलावा, विपक्षी बयानों (जैसे संजय राउत के) ने बीजेपी पर हमला तेज किया है।
अन्य विवाद:
लाडकी बहिन योजना की किश्तें आखिरी समय में जारी होने पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत की। मुस्लिम मेयर को लेकर बीजेपी नेताओं के बयान (जैसे “कोई खान मेयर नहीं बनेगा”) ने सांप्रदायिक रंग दिया। कुल मिलाकर, ठाकरे गठबंधन की वजह से एंटी-बीजेपी वोट बंटने की संभावना कम है, जो महायुति के लिए चिंता का विषय है।








