ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि उनके प्रयासों से कांगो और रवांडा के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पुरस्कार नहीं मिलेगा। पाकिस्तान ने ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया, यह दावा करते हुए कि मई 2025 में भारत-पाक संकट के दौरान उनकी कूटनीति ने युद्ध टाला।
हालांकि, भारत ने ट्रंप के दावों को खारिज किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि मई में चार दिन के सैन्य टकराव के बाद युद्धविराम दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने भी कहा कि भारत ने कभी भी पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों में बाहरी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की।
ट्रंप ने यह दावा पहले भी कई बार दोहराया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यापार रोकने की धमकी देकर दोनों देशों को युद्धविराम के लिए मजबूर किया। भारत ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि व्यापार का मुद्दा इस दौरान कभी चर्चा में नहीं आया।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भी ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए समर्थन दिया, जिसके बाद ट्रंप ने उन्हें व्हाइट हाउस में लंच के लिए आमंत्रित किया। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह कूटनीति पाकिस्तान को ईरान के खिलाफ रणनीतिक सहयोग के लिए तैयार करने का प्रयास हो सकता है।
एक्स पर पोस्ट्स में भी इस मुद्दे पर चर्चा है, जहां कुछ यूजर्स ट्रंप के दावों पर सवाल उठाते हैं, जबकि अन्य उनके नोबेल पुरस्कार के नामांकन पर बहस कर रहे हैं।








