सोशल मीडिया पर हरियाणवी रागनी एवं रचनाओं से समाज को संदेश देते मौजु डॉक्टर दिनोद

(पशु-सेवा को समर्पण के साथ-साथ माैजु डॉक्टर लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ते गए। पिछले दो दशक से मौजु डॉक्टर अपने लिखे गीतों-कविताओं के साथ-साथ हमारे प्राचीन/वरिष्ठ लोक कवियों की रचनाओं को समाज के सामने लाकर समाज को हरियाणावी संस्कृति से जोड़ने का अतुल्य प्रयास कर रहे हैं। पेशे से पशु चिकित्सा एवं विकास सहायक मनोज़ कुमार उर्फ़ मौजु डॉक्टर एक आशु कवि और हरियाणवी के अच्छे गायक हैं। सोशल मीडिया पर हरियाणावी रागनी और खुद की मौलिक रचनाओं की हज़ारों पोस्ट से लोकप्रिय हुए मौजु डॉक्टर,दिनोद हमारे देश के वीर-शहीदों जैसे शहीद भगतसिंह, सुभाष चद्र बोस,लाल बहादुर शास्त्री,शहीद उद्यम सिंह के साथ-साथ उपदेशात्मक भजन व रागनियां सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करते हैं तो देशभक्ति की रसधार बहने लगती है, लोगों को आज के अश्लील दौर में एक सभ्य और जीवन मूल्यों से भरे गीतों को पढ़ने का सुनहरा अवसर मिलता है।)

डॉ. सत्यवान सौरभ

प्राचीन समय से ही इंसान का विभिन्न कलाओं के प्रति अटूट रिश्ता रहा है। कभी कलाकारों के फ़न ने तो कभी कलाओं के मुरीद लोगों ने इस ज़माने में नए-नए रंग बिखेरें हैं। ये माना जाता है कि आत्मा की तरह कला भी अजर-अमर है, ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती है और नया रूप लेती है। आज कला के रूप बदरंग हो गए है। कलाकार अपने उद्देश्यों से भटक गए हैं और पैसों के पीछे दौड़ पड़े हैं जो एक तरह कला को बेचने जैसा है। आज कला के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता समाज को लील रही है। मगर इन सबके बीच आज भी देश में कुछ ऐसे लोक़ कलाकार/कवि हैं जो भारत की प्राचीन सभ्यता को नए रंग देकर उन आदर्श और मूल्यों को बचाने की कोशिश में लगे है। जी हां, उन्हीं में से एक हैं हरियाणा के भिवानी जिले के दिनोद गाँव की माटी में जन्मे माैजु डॉक्टर दिनोद। किसान परिवार में जन्मे माैजु डॉक्टर पेशे से पशु चिकित्सा से जुड़े है। इनके पिता स्वर्गीय कप्तान सुबे सिंह यादव एक किसान होने के साथ-साथ भारतीय सेना क़े जाबांज सिपाही भी थे। जिन से इनको संघर्ष करने और धैर्य रख आगे बढ़ने की सीख मिली।

पशु-सेवा को जारी रखते हुए माैजु डॉक्टर लेखन क्षेत्र में आगे बढ़ते गए। पिछले दो दशक से मौजु डॉक्टर अपने लिखे गीतों-कविताओं के साथ-साथ हमारे प्राचीन/वरिष्ठ लोक कवियों की रचनाओं को समाज के सामने लाकर समाज को हरियाणावी संस्कृति से जोड़ने का अतुल्य प्रयास कर रहे हैं। पेशे से पशु चिकित्सा एवं विकास सहायक मनोज़ कुमार उर्फ़ मौजु डॉक्टर एक आशु कवि और हरियाणवी के अच्छे गायक हैं। इन सबके अलावा मौजु डॉक्टर यू-ट्यूब एवं सोशल मीडिया के जरिए भारत की प्राचीन संस्कृति से जुड़े किस्सों को वीडियो और ऑडियो रूप में फ्री में शेयर करते हैं ताकि हरियाणवी संस्कृति को बचाया जा सके। हरियाणवी संस्कृति के विभिन्न रंगों को इन्होने रागनियों और नाटकों के जरिए शेयर करके बखूबी डिजिटल तौर पर पिरोया है और लोगों के मनों तक पहुँचाया है।

कवि मौजु डॉक्टर अपने सिद्धांतों और कलम से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करते। आज जब नग्न संस्कृति सामयिक गीतों व रागनियों पर हावी है तब भी इन्होंने अपने मूल्यों को बनाए रखा और हमारे ऐतिहासिक व पौराणिक गीतों से समाज को रूबरू करवाया है। बेशक आज के तड़क-भड़क वाले अश्लील वीडियो की तुलना में उनको कम शेयर किया गया है मगर उन्होंने हमारी धरोहर को सहेजने कि दिशा में अपना अमूल्य योगदान दिया है। वास्तव में अपनी प्राचीन कला को बनाए रखना बहुत बड़ी बात है। आज के दौर में युवा पीढ़ी यू-ट्यूब और अन्य सोशल प्लेटफार्म पर घटिया स्तर के वीडियोज़ और ऑडियो को पसंद करती नज़र आ रही है। ऐसे में मौजु डॉक्टर के सामाजिक ताने-बाने से जुड़े गीतों का प्रयास बड़ी छाप छोड़ रहा है। इस दौर की मीडिया को ऐसे कलाकारों के प्रयासों को जोर-शोर से प्रचारित-प्रसारित करना चाहिए ताकि हमारे प्राचीन मूल्यों को आज की इस शोषणकारी और अश्लील संस्कृति से दूर रखा जा सके। जब मौजू डॉक्टर जैसे कलमकार अपनी कलम से समझौता नहीं करते तो हम क्यों घर बैठे ही अपनी सभ्यता और संस्कृति को तार-तार कर रहें है।

सोशल मीडिया पर मखियों की तरह भिनभिनाते अश्लील गीतों को समाज से बाहर करने के लिए हमें अच्छे गीतों और अच्छे कलाकारों को उचित मान- सम्मान देना ही होगा। तभी हम अपनी कला और हुनर को को वास्तविक रूप देकर एक रहने योग्य समाज आने वाली पीढ़ियों को देकर जा पाएंगे। लोक कलाएं वास्तव में किसी भी समाज की नब्ज होती है। हमें अपने बच्चों को इन कलाओं से रूबरू करवाना चाहिए ताकि वो समाज और देश के एक सचेत नागरिक बन सके। साथ ही ये भी ध्यान रखना चाहिए कि आज के इस इंटरनेट युग में हमारे बच्चे क्या देख रहें है व क्या सुन रहें है? अच्छे कलाकार और उनकी कलाएं समाज के सच्चे पथ-प्रदर्शक हैं लेकिन उनको चुनना हमारी जिम्मेवारी है। प्रदेश एवं केंद्र सरकार को आज की बिगड़ती संस्कृति के लिए दोषी तड़क-भड़क के गानों को खासकर सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म पर बैन करना चाहिए। हमें भी मौजु डॉक्टर जैसे कलाकारों को ढूंढकर उनकी फॉलो करने की जरूरत है ताकि वो हमारी संस्कृति को बचाने के लिए कर रहें प्रयासों को और आगे गति दे सके तभी हमारी संस्कृति,संस्कार व धरोहर बच पाएंगे।

  • Related Posts

    ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के कथित नारे पर FIR, कांग्रेस MP ने मांगी माफी
    • TN15TN15
    • August 26, 2026

    महाराष्ट्र (Maharashtra News) के नांदेड़ से एक ऐसा…

    Continue reading
    CM सुक्खू का BJP पर हमला, ‘व्हाइट पेपर’ खोलेगा करप्शन के राज
    • TN15TN15
    • August 25, 2026

    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की सियासत इन दिनों…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    डॉ. अंबेडकर की मनुस्मृति की आलोचना

    • By TN15
    • August 26, 2026
    डॉ. अंबेडकर की मनुस्मृति की आलोचना

    ‘हर संभव सहायता’, बाढ़ से तबाही पर PM मोदी का नेपाल के प्रधानमंत्री को फोन

    • By TN15
    • August 26, 2026
    ‘हर संभव सहायता’, बाढ़ से तबाही पर PM मोदी का नेपाल के प्रधानमंत्री को फोन

    नेपाल में बाढ़ से तबाही के बीच यूपी के इन जिलों में अलर्ट! CM योगी ने दिए निर्देश

    • By TN15
    • August 26, 2026
    नेपाल में बाढ़ से तबाही के बीच यूपी के इन जिलों में अलर्ट! CM योगी ने दिए निर्देश

    ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के कथित नारे पर FIR, कांग्रेस MP ने मांगी माफी

    • By TN15
    • August 26, 2026
    ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के कथित नारे पर FIR, कांग्रेस MP ने मांगी माफी

    Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 16 की मौत, 291 विदेशी नागरिक लापता, भारत भेजने जा रहा है मदद

    • By TN15
    • August 26, 2026
    Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 16 की मौत, 291 विदेशी नागरिक लापता, भारत भेजने जा रहा है मदद

    लड़ते रहिए जाति और धर्म के नाम, मरने की व्यवस्था कर दी है धंधेबाज लोगों ने!

    • By TN15
    • August 26, 2026
    लड़ते रहिए जाति और धर्म के नाम, मरने की व्यवस्था कर दी है धंधेबाज लोगों ने!