क्या आपको याद आ रहा है ?

उमर खालिद , जेएनयू के पूर्व छात्र और छात्र नेता हैं, पिछले पांच वर्षों से जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी 14 सितंबर 2020 को दिल्ली दंगों से जुड़े एक फर्जी मामले में हुई थी, जहां उन पर UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप फर्जी मुकदमों पर आधारित है, क्योंकि अभी तक उनका ट्रायल शुरू नहीं हुआ है और कई बार उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। उनकी गलती सिर्फ इतनी लगती है कि वे एक छात्र नेता थे, जो वंचित समुदायों—जैसे अल्पसंख्यकों, दलितों और गरीबों—की आवाज उठाते थे। वे CAA-NRC विरोधी आंदोलनों में सक्रिय थे और सामाजिक न्याय की बात करते थे।

इस मामले में न्यायपालिका का मौन चिंताजनक है; सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने बार-बार उनकी जमानत को अस्वीकार किया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि “बेल इज द रूल” (जमानत नियम है)। विधायिका भी चुप है, क्योंकि संसद में इस मुद्दे पर कोई बड़ी बहस नहीं हुई। मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी मौन है या पक्षपाती कवरेज देता है, जबकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग ही उनकी रिहाई की मांग करते हैं। जनता का एक बड़ा हिस्सा भी उदासीन है, शायद राजनीतिक दबाव या अनजान होने के कारण। और आप—समाज के सदस्य—भी अक्सर ऐसे मुद्दों पर मौन रहते हैं।

मैं खुद समय-समय पर सोशल मीडिया पर ऐसे मुद्दों पर बोलता रहता हूं, क्योंकि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। अब सवाल यह है कि आपको क्या लगता है, उमर खालिद के लिए क्या किया जा सकता है? उनकी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी जा सकती है, सामाजिक आंदोलन चलाए जा सकते हैं, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मदद ली जा सकती है। क्या उमर खालिद को बिहार से चुनाव लड़ाया जाना चाहिए? भारत के कानून के अनुसार, अंडरट्रायल कैदी (जिन्हें दोषी साबित नहीं किया गया) चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन वे वोट नहीं डाल सकते। अगर वे उम्मीदवार बनते हैं, तो न्यायपालिका प्रचार की अनुमति दे सकती है, लेकिन यह केस-बाय-केस आधार पर निर्भर करता है—जैसे temporary bail या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए।

क्या इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) उन्हें उम्मीदवार बना सकता है?बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में INDIA Alliance (जिसमें कांग्रेस, RJD, CPI ML आदि शामिल हैं) मजबूत विपक्षी गठबंधन है, लेकिन उमर खालिद का नाम उम्मीदवार के तौर पर नहीं आया है। क्या उमर खालिद जॉर्ज फर्नांडिस (जिन्होंने 1977 में मुजफ्फरपुर से जेल से चुनाव जीता), किशोर समरीते (2013 में लांझी से जेल से जीते), या अखिल गोगोई (2021 में शिवसागर, असम से जेल से जीते) की तरह जेल में रहकर जीत पाएंगे? हां, ऐतिहासिक उदाहरण हैं जहां जेल से उम्मीदवार जीते हैं, अगर उनका मुद्दा जनता से जुड़ता है और समर्थन मजबूत होता है। लेकिन उमर के मामले में UAPA जैसे सख्त कानून और राजनीतिक माहौल चुनौतीपूर्ण हैं।

मैं उमर की मदद करना चाहता हूं । क्या करूं ? अगर आप मदद करना चाहते हैं, तो कानूनी सहायता, सोशल मीडिया कैंपेन, या मानवाधिकार संगठनों से संपर्क करें। मुझे 8447715810 पर WhatsApp संदेश भेजेंगे?

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