उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण कोर्ट फैसले से जुड़ी है। यह मामला कोडीन युक्त कफ सिरप (जो नशीला पदार्थ माना जाता है) की अवैध तस्करी से संबंधित है। मैंने इसकी पुष्टि की है और नीचे पूरी डिटेल्स दे रहा हूं। यह फैसला नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्ती का एक उदाहरण है, खासकर जब उत्तर प्रदेश में कोडीन सिंडिकेट पर चल रही व्यापक कार्रवाई के बीच आया है।
मामले का बैकग्राउंड
घटना की तारीख: 23 मार्च 2024 (या हालिया वर्ष, सटीक तारीख के अनुसार)।
स्थान: बस्ती रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म नंबर 1।
पकड़े गए आरोपी:
अहमर खान उर्फ तारिक (बलरामपुर जिले का निवासी)।
रमजान शेख (बलरामपुर जिले का निवासी)।
बरामदगी: जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) की टीम ने तलाशी ली तो तारिक के पास से 300 शीशी और रमजान के पास से 215 शीशी कोडीन युक्त सिरप बरामद हुई। कुल मिलाकर 515 शीशी, जिनकी कीमत बाजार में लाखों में हो सकती है।
आरोपियों का कबूलनामा: पूछताछ में उन्होंने बताया कि यह सिरप उन्हें सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ‘जायसवाल’ से मिला था। उनका मकसद इसे मुंबई पहुंचाना था, जहां यह अवैध रूप से बिकता है।
कानूनी कार्रवाई: जीआरपी ने मौके पर ही एनडीपीएस एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच पूरी होने पर 23 जून को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
कोर्ट का फैसला
अदालत: बस्ती फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय, अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार कटियार।
सजा: दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास (रिगोरस इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई गई। साथ ही, प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 1 वर्ष की कैद होगी।
सुनवाई की गति: केस की सुनवाई मात्र 9 महीनों में पूरी हो गई, जो फास्ट ट्रैक कोर्ट की तेजी को दर्शाता है।
न्यायाधीश की टिप्पणी: अदालत ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि दोनों की कोई पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन बरामद मात्रा बहुत गंभीर है। कोडीन सिरप नशे के प्रसार का बड़ा माध्यम है, जो समाज में लत फैलाता है। इसलिए ऐसी तस्करी पर कठोर कार्रवाई जरूरी है। यह फैसला नशीले पदार्थों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।








