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चिराग की 5 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर क्या नीतीश ने बिगाड़ दिया एनडीए का फॉर्मूला?

नीतीश कुमार की जदयू ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी करते हुए चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को आवंटित 6 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे एनडीए गठबंधन में दरारें साफ नजर आ रही हैं। ये सीटें हैं: सोनबरसा (रत्नेश सदा), मोरवा (विद्यासागर निषाद), एकमा (धूमल सिंह), राजगीर (कौशल किशोर), मटिहानी (राजकुमार सिंह) और गैघाट (कोमल सिंह)। जदयू को कुल 101 सीटें, भाजपा को 101, एलजेपी को 29, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को 6 और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (एचएएम) को 6 सीटें मिली हैं, लेकिन सीट बंटवारे पर असंतोष ने गठबंधन को हिला दिया है।

चिराग पासवान की प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन नीतीश कुमार केंद्रीय नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें उनकी मजबूत सीटें एलजेपी को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीतीश को फोन करना पड़ा। एचएएम के जीतन राम मांझी ने भी असंतोष जताते हुए बोध गया और मखदुमपुर जैसी एलजेपी की सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की बात कही है। आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “एनडीए में सब ठीक नहीं है।”
क्या इससे एनडीए का फॉर्मूला बिगड़ गया? हां, काफी हद तक—यह सीट बंटवारे की खींचतान ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर जब चुनाव 6 और 11 नवंबर को होने हैं। हालांकि, मांझी का दावा है कि एनडीए बहुमत से जीतेगा, और यह प्री-पोल ड्रामा भी हो सकता है। लेकिन अगर यह जारी रहा, तो विपक्ष को फायदा हो सकता है।

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