रूस ने पाकिस्तान को सस्ते दामों पर कच्चा तेल देने का प्रस्ताव रखा है। पाकिस्तान में रूस के राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर इस्लामाबाद औपचारिक रूप से संपर्क करता है तो मॉस्को रियायती दर पर तेल सप्लाई करने को तैयार है।
पाकिस्तान को मौके का फायदा उठाना चाहिए : रूस
राजदूत खोरेव ने कहा, ‘हम पाकिस्तान को डिस्काउंट पर तेल दे सकते हैं। पाकिस्तान को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए.’ उन्होंने जोर दिया कि अभी तक पाकिस्तान की तरफ से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं आया है, लेकिन रूस का रुख पूरी तरह सकारात्मक है।
यह ऑफर ऐसे समय में आया है जब ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट प्रभावित हुआ है। इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस आयात करता है. रूट ब्लॉक होने से ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस गहराया है और कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
ऊर्जा संकट से जूझ रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान पहले से ही भारी ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है और आम लोग महंगाई से परेशान हैं. रूस का यह ऑफर पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
भारत को छूट खत्म, पाकिस्तान को डिस्काउंट का ऑफर
खास बात यह है कि रूस ने हाल ही में भारत को रियायती तेल पर दी जाने वाली छूट लगभग खत्म कर दी है। 2022 से 2025 तक भारत को रूसी तेल बहुत सस्ता मिल रहा था, लेकिन अब कीमत 98-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. वहीं पाकिस्तान को खुद बढ़कर डिस्काउंट का ऑफर दिया जा रहा है।
रूसी राजदूत ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बन सकता है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को पहल करनी होगी। रूस और पाकिस्तान के रिश्ते पहले इतने अच्छे नहीं थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच संबंध सुधरे हैं।
रूसी राजदूत ने अमेरिका पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अल्बर्ट खोरेव ने ईरान युद्ध के लिए अमेरिका की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाइयों से पूरी दुनिया हैरान है। ईरान में एक स्कूल पर हुए हमले को ‘अत्यंत निंदनीय’ बताया और तुरंत शांति की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि सभी पक्ष ताकत इस्तेमाल से बचें और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत कूटनीति से मुद्दे सुलझाएं।
पाकिस्तान अगर रूस का ऑफर स्वीकार करता है तो उसे सस्ता तेल मिलने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि पाकिस्तानी रिफाइनरियां रूसी क्रूड ऑयल (जो भारी है) को प्रोसेस करने में कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करती रही हैं, इसलिए आगे बातचीत में ये मुद्दे भी सामने आ सकते हैं।