विधानसभा चुनावों की पूर्व संध्या पर SIR (Special Intensive Revision) की आपकी अचानक घोषणा ने बिहार में लाखों वास्तविक मतदाताओं को परेशान कर दिया। आपकी कार्रवाइयां आम तौर पर पक्षपातपूर्ण मानी गई, चाहे सही हो या गलत, जैसे यह सब बिहार में सत्तारूढ़ दल को मदद करने के लिए किया जा रहा था। नतीजतन, ECI की प्रतिष्ठा और साख को लाखों मतदाताओं, विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों और नागरिक अधिकार संगठनों की नज़रों में भारी नुकसान पहुँचा है, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता।
यहां तक कि इससे न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र को चाहने वाले सभी लोग चिंतित हैं। उन्हें एहसास है कि मतदाता सूची (Electoral Roll) के संबंध में आपकी छीछालेदर होने के बाद भी आपके हाथों में सत्तारूढ़ दल NDA के चुनावी हितों के हिसाब से चुनावी समयपत्रक बनाने के लिए काफ़ी गुंजाइश है।
इसलिए, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान माँग करता है कि पूरे राज्य में सभी सीटों के लिए एक ही दिन मतदान हो और मतदान के 3 दिनों के अंदर नतीजे घोषित किए जाएं।
2020 में विधानसभा की 243 सीटों के लिए चुनाव 3 चरणों में और सिर्फ 11 दिनों में हुए:
पहला चरणः 28 अक्टूबर, 2020 71 सीटें
दूसरा चरण: 3 नवंबर, 2020 94 सीटें
तीसरा चरण: 7 नवंबर, 2020 78 सीटें।
ताज्जुब की बात यह है कि चुनाव आयोग ने 2024 में महाराष्ट्र में एक ही दिन में विधानसभा चुनाव कराए। महाराष्ट्र के लोगों ने 23 नवंबर, 2024 को एक ही दिन में अपने 288 प्रतिनिधियों का चुनाव किया। दिलचस्प बात यह है कि बिहार में सीटों की संख्या महाराष्ट्र विधानसभा की सीटों से बहुत कम है।
इसलिए, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान का मानना है कि आयोग एक ही दिन में चुनाव करा सकता है, और बिहार या देश में कहीं भी बहु-चरणीय मतदान की आवश्यकता नहीं है।
इन बातों के मद्देनज़र, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान यह माँग दोहराता है कि बिहार में विधानसभा चुनाव एक ही दिन में कराए जाएं और पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मतदान के 3 दिनों के अंदर परिणाम घोषित किए जाएं।
प्रो. आनंद कुमार








