आम आदमी पार्टी के लिए अपने को साबित करने के लिए दिल्ली एमसीडी उपचुनाव एक अच्छा मौका है। 12 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में जीत दर्ज कर आम आदमी पार्टी दिल्ली में यह संदेश दे सकती है कि बीजेपी ने जनता को भ्रमित कर विधानसभा चुनाव जीता है। अभी भी लोगों को आम आदमी पार्टी पर विश्वास है।
दरअसल आम आदमी पार्टी ने अन्ना आंदोलन के दम पर पर दिल्ली को कब्जाया। पानी और बिजली फ्री कर गरीब हितैषी होने का संदेश दिया। केजरीवाल को गुमान था कि अब दिल्ली में उसे कोई हराने वाला नहीं है। गत विधानसभा चुनाव में वह खुद भी हारे और पार्टी भी। बीजेपी ने केजरीवाल को उसके ही दांव से चित कर दिया। मतलब फ्री की योजनाओं का बीजेपी ने केजरीवाल से भी बढ़कर ऐलान कर दिया।
केजरीवाल यह भूल गए थे कि जिस दिल्ली की जनता को वह फ्री की योजनाओं के नाम पर बरगला रहे थे उस जनता को अब बीजेपी ने बरगला दिया। एमसीडी उप चुनाव में यदि केजरीवाल अपनी सीटें बचाते हुए बीजेपी की सीटों पर भी अपनी पार्टी को जिता ले गए तो वह बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।
ऐसे ही बीजेपी का प्रयास होगा कि अपनी सीटों के साथ ही वह आम आदमी पार्टी की सीटें भी कब्जा ले। ऐसा करने में यदि बीजेपी सफल हुई तो वह आम आदमी पार्टी के साथ ही कांग्रेस पर भी दबाव बना लेगी। दरअसल विधानसभा चुनाव हारने के बाद केजरीवाल को सदमे से निकलने में बहुत समय लगा था। गुजरात में कुछ सीटें जीतने के बाद थोड़ी ऑक्सीजन उनको मिली थी। फिर भी वह दिल्ली में अब खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। यदि यह उपचुनाव उन्होंने जीत लिया तो वह दिल्ली में दहाड़ने लगेंगे।

