रवा राजपूत समाज के उत्थान हेतु गहन चर्चा हृदयस्पर्शी चिंतन और लिया गया सामूहिक संकल्प

आर्यावर्त रवा राजपूत एकता एवं सेवा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई सम्पन्न।

बैठक में उमड़ा रवा राजपूतों का अभूतपूर्व जनसैलाब

 

मुजफ्फरनगर – आर्यावर्त रवा राजपूत एकता सेवा समिति (पंजी०), शाखा जनपद(मुजफ्फरनगर) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन ग्राम बडकता (बुढ़ाना) में आशीष कुमार प्रधान की चौपाल पर किया गया। इस ऐतिहासिक बैठक में समाज बंधुओं का ऐसा अद्भुत जनसैलाब उमड़ा मानो एकता, सहयोग और स्वाभिमान की एक नई लहर ने जनमानस को छू लिया हो। हर चेहरा उत्साह से चमक रहा था, और हर दिल में समाज के उत्थान की सच्ची भावना स्पष्ट झलक रही थी। यह सभा केवल एक बैठक नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना की शक्ति का जीवंत उदाहरण थी।बैठक का आयोजन समिति के अध्यक्ष आदरणीय गुलजारीलाल के आह्वान पर संपन्न हुआ।

बैठक की अध्यक्षता चौधरी निरंकार सिंह (बडकता) द्वारा की गई, एवं कुशल संचालन समिति उपाध्यक्ष रामकरण द्वारा किया गया।मंच पर उपस्थित सम्मानित अतिथि:
मास्टर महावीर सिंह (फुगाना),अध्यक्ष गुलजारीलाल (सठेडी),महासचिव डॉ. रविंद्र सिंह जादौन (सठेडी), जगदीश आर्य जी (सठेडी), नरेंद्र सिंह राजपूत (दताना),अभिषेक रवा राजपूत (याहियापुर),सतबीर सिंह (बड़का), राजेश चौहान (टोहडी),इन सभी ने अपने विचारों और अनुभवों से सभा को प्रेरणा, दिशा और उद्देश्य प्रदान किया।
बैठक में समाज के उत्थान हेतु हुई गहन चर्चा: हृदयस्पर्शी चिंतन और सामूहिक संकल्प,
बैठक में समाजहित से जुड़े अनेक ज्वलंत और संवेदनशील विषयों पर अत्यंत विचारशील और भावनात्मक वातावरण में गहन चर्चा की गई। मंचासीन विद्वतजनों और समाज के जागरूक सदस्यों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर अपना मंथन साझा किया,आज के समय में परिवारों में बढ़ते मानसिक तनाव और विवाह विच्छेद जैसी गंभीर समस्याएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। इसे रोकने हेतु परिवार के वरिष्ठ सदस्यों को मार्गदर्शक की भूमिका निभानी होगी। आपसी संवाद, समझ और सहानुभूति से ही इन समस्याओं का समाधान संभव है ऐसे गुलज़ारी लाल समिति अध्यक्ष ने अपने विचार रखें।संयुक्त परिवार प्रणाली को पुनः अपनाने का विचार प्रमुखता से रखा गया।

मृत्यु उपरांत ब्रह्मभोज में सादगी का संकल्प:
समाज ने यह सामूहिक निर्णय लिया कि मृत्यु उपरांत होने वाले ब्रह्मभोज को सादगी, मर्यादा और संवेदना के साथ सम्पन्न किया जाए। परंपरा का निर्वाह करते हुए भोजन को आलू की सब्जी, पूरी, दाल, चावल और हलवा तक सीमित रखने की सर्वसम्मति बनी। यह कदम अनावश्यक खर्चों को रोकते हुए, वास्तविक श्रद्धा को प्राथमिकता देगा।
विवाह की उपयुक्त आयु का समर्थन:समाज में विवाह की न्यूनतम आयु 24-25 वर्ष सुनिश्चित करने के पक्ष में एकजुटता दिखाई दी। यह केवल एक सामाजिक सुधार नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों को संवेदनशील, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है बताया,इस दिशा में माता-पिता को अपनी सोच में सकारात्मक बदलाव लाना होगा।
जातिगत जनगणना में रवा राजपूत की पहचान दर्ज कराने का आह्वान:जातिगत जनगणना में रवा राजपूत समाज की विशिष्ट पहचान दर्ज हो, इसके लिए सभी नागरिकों को सजग और सतर्क रहना होगा। यह सामाजिक अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने की आवश्यकता:
हर परिवार, हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि समाज का विकास तभी संभव है जब हम सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियां भी निभाएं। संगठन की शक्ति में ही हमारी असली पहचान और प्रगति छुपी है। बिरादरीहित में कार्य करना अब विकल्प नहीं, आवश्यकता बन गया है।दिन के समय विवाह करने का प्रस्ताव:
परंपराओं को आधुनिक दृष्टिकोण से देखने की पहल करते हुए दिन के समय विवाह सम्पन्न कराने पर गंभीर विचार किया गया। यह न केवल सामाजिक सादगी को बढ़ावा देगा, बल्कि युवा पीढ़ी को व्यावहारिकता की ओर भी प्रेरित करेगा मास्टर महावीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा। मुख्य वक्ता के रूप में कुशल वीर सिंह तंवर (सरधन)अपने ओजस्वी विचारों और संतुलित दृष्टिकोण से सभा को एक नई ऊर्जा दी। उनके शब्दों में अनुभव, आत्मविश्वास और समाज के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट झलक रही थी।मा० मदन सिंह (सठेड़ी)समाज को आत्मबल और आत्मगौरव से भरने वाले उनके प्रेरणात्मक शब्दों ने युवाओं के भीतर एक नई चेतना का संचार किया।राकेश नेताजी (सठेड़ी) युवाओं के भीतर एकता, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करते हुए उन्होंने समाज की जड़ों को मजबूत करने का संदेश दिया।नेपाल सिंह (हाजीपुर)सरल शब्दों में समाज की एकता और समरसता को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने वह बात कही जो सीधे हृदय में उतर गई।
विनोद कुमार (हाजीपुर) शालीन भाषा और स्पष्ट दृष्टिकोण के माध्यम से उन्होंने समाज के जटिल विषयों को बेहद सहजता से प्रस्तुत किया।संजीव सोमल (बेहड़ा सादात)पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनका भावनात्मक संदेश सुनकर उपस्थितजन भाव-विभोर हो उठे।
विक्रम सिंह (गढ़ी सखावतपुर) संगठनात्मक मजबूती पर बल देते हुए उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि जब समाज संगठित होता है, तभी सशक्त होता है।
बिजेन्द्र कुमार (गढ़ी सखावतपुर)समाज की शिक्षा, जागरूकता और समुचित प्रगति पर उनके सारगर्भित सुझाव सभी के लिए प्रेरणा बन गए।
संजय उर्फ बिट्टू (तिगांई) अपनी स्पष्टवादिता और साहसिक विचारों से उन्होंने युवा शक्ति को दिशा देने का कार्य किया, जो लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
राधेश्याम सिंह (दूधली)अपने जीवन के अनुभवों को समाजहित में साझा करते हुए उन्होंने सभी को गहराई से सोचने पर विवश कर दिया।
महेश प्रधान (बड़ौदा)उनकी विचारशील एवं ओजस्वी वाणी ने सभा को गरिमा से भर दिया। उनके भावपूर्ण शब्दों ने न केवल दिशा दी, बल्कि हर श्रोता के हृदय को स्पर्श किया।
कुलदीप सिंह (बडकता-मुजफ्फरनगर) समाजसेवा की भावना और निष्कलंक समर्पण उनके विचारों में झलकता रहा। उनका संबोधन युवाओं और बुजुर्गों के बीच एक सेतु जैसा रहा।
नरेंद्र सिंह राजपूत (दताना) ब्रह्मभोज को सादगीपूर्ण और मर्यादित ढंग से सम्पन्न करने के प्रस्ताव पर नरेंद्र सिंह राजपूत जी ने न केवल पूर्ण समर्थन जताया, बल्कि समाज को इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा ब्रह्मभोज दिखावे का माध्यम नहीं, श्रद्धा और स्मृति का संस्कार है। अतः इसे व्यर्थ के खर्च और आडंबर से मुक्त करते हुए सादगी से करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”*
उनके विचारों ने लोगों के मन में गहराई से असर डाला और उपस्थित जनसमूह ने भी इस सोच को सहर्ष स्वीकार किया।
समिति के अध्यक्ष गुलजारीलाल ने आर्यावर्त रवा राजपूत एकता सेवा समिति की ओर से सभा में अपने विचार अत्यंत प्रभावशाली और सरलता से रखे।
उनकी वाणी में संगठन के प्रति समर्पण, समाज के प्रति सच्ची निष्ठा और भविष्य को लेकर गहरी सोच स्पष्ट झलक रही थी।
“जब विचार सशक्त हों और उद्देश्य समाज की भलाई हो, तो हर शब्द आंदोलन बन जाता है।”
इन सभी वक्ताओं ने वही किया शब्दों से समाज को जागृत किया।
बैठक में उपस्थित सभी सम्माननीय अतिथियों एवं समाजबंधुओं के लिए सूक्ष्म जलपान की भी स्नेहिल एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी।
बैठक का भावपूर्ण समापन अध्यक्षता कर रहे चौधरी निरंकार सिंह (बड़कता) द्वारा अत्यंत गरिमामय और सौम्य शब्दों में किया गया। उनकी वाणी में अनुभव की गहराई, समाज के प्रति समर्पण और एक सच्चे नेतृत्व की झलक स्पष्ट दिखाई दी। बैठक में मुख्य रूप से गौरव राजपूत (दूधली), भगत सिंह, डॉ रोहतास सिंह, राजपालसिंह, वेदपाल सिंह (याहियापुर), मा० धर्मवीर सिंह (पुट्ठा), अश्वनी कुमार (बडौदा), कुलदीप कुमार (तिगांई), विपिन कुमार, संजय सिंह तंवर (मुबारिकपुर), संजीव कुमार (खान्जहापुर), राहुल तंवर, पवन प्रधान, अजय चौहान, जिले सिंह, रविंद्र कुमार, सतीश कुमार, विक्रम सिंह, हिमांशु, राकेश नेताजी (गंगधाडी), धीरज सिंह, नीतू सिंह, दीपांशु कुमार, सुंदर सिंह, आत्माराम (चिंदौड़ा), रोहित कुमार (मकसूदाबाद), वीरेंद्र मोघा, भूपेंद्र सिंह, सुभाष सिंह (सठेडी), हरवीर सिंह (भ॑गेला), नारायण सिंह (लाडपुर), नरेश कुमार चैयरमेन (खेडी राजपूताना), रोहतास नेताजी (अहमदगढ़), गौरव कुमार, शशांक चौहान, विक्रम सिंह, प्रहलाद सिंह, संजीव कुमार, आकाश कुमार, चंद्रशेखर(बडकता), सतवीर सिंह, भजन सिंह, नरेंद्र सिंह (बड़का) से सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे और बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

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