युद्ध नहीं शांति चाहिए, युद्ध विराम लागू करो प्रस्ताव संसद में पारित करे सरकार
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की संवैधानिक गारंटी दे सरकार
नई दिल्ली । डॉ. राम मनोहर लोहिया की 116वीं जयंती तथा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर 23 मार्च को टी. एन. वाजपेयी हॉल, नई दिल्ली में समता सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी एवं समापन आनंद मिश्रा द्वारा किया गया। सपा सांसद रामजीलाल सुमन, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने खुले सत्र में सम्मेलन को संबोधित किया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता रमाशंकर सिंह, विजय प्रताप, डॉ ऋतु प्रिया, आलोक मेहता, प्रो चितरंजन मिश्रा, बी आर पाटिल ने की । मुख्य वक्ता के तौर पर रमेश पटनायक, प्रोफेसर अरुण कुमार, सौम्य दत्ता, अमूल्य निधि ने वक्तव्य रखे।
9 घंटे चले सम्मेलन के दौरान 15 राज्यों के 60 वक्ताओं ने टिप्पणियां की, जिनमें से 30 युवा वक्ता शामिल थे।

समता सम्मेलन में देशभर से आए समाजवादियों ने क्रांतिकारियों के सिद्धांतों और समाजवादी मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सम्मेलन में कहा गया कि डॉ. राममनोहर लोहिया और भगत सिंह का समाजवादी भारत के निर्माण का सपना आज भी अधूरा है, दुनिया में साम्राज्यवादी ताकतें अमरीका और इजरायल के नेतृत्व में दुनिया पर युद्ध थोप रही है। कॉर्पोरेट लूट के चलते
गैर बराबरी चरम पर है। धार्मिक कट्टरपंथ, नफरत और हिंसा के परिणामस्वरूप लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, शांति, सौहार्द और समता पर आधारित समाज निर्माण की संभावनाएं धूल धूसरित होती जा रही हैं।
सम्मेलन में अमरीका-इजराइल की युद्ध नीतियों की निंदा करते हुए सरकार से तत्काल संसद में युद्धविराम का प्रस्ताव पारित कराने की मांग की गई । सम्मेलन में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और साफ हवा पानी को मौलिक अधिकार बनाने, किसानों-मजदूरों के आंदोलनों का समर्थन करने, एम एस पी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पुरानी पेंशन नीति बहाल करने व 4 लेबर कोड रद्द करने की मांगों का समर्थन किया गया।

सम्मेलन में स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत एवं मूल्यों की रक्षा और पुनर्स्थापना हेतु हर संभव प्रयास करने, समाजवाद के सपने को साकार करने के लिए सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने, साम्राज्यवादी शक्तियों का मुखर विरोध जारी रखने तथा अमरीका-इजराइल के साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने, देशभर के वंचित, पीड़ित और शोषित वर्गों—दलित, आदिवासी, किसान और श्रमिक—को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने हेतु संगठित जनशक्ति के माध्यम से आंदोलन तेज करने, 26 जनवरी, 23 मार्च, 1 मई, 17 मई, 9 अगस्त, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर, 11-12 अक्टूबर और 26 नवंबर जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर युवा एवं महिलाओं की विशेष भागीदारी के साथ जनजागरण, जनसंवाद यात्राएं, सत्याग्रह और अन्य जन आंदोलन कार्यक्रम आयोजित करने, समता, न्याय, शांति और मानवीय मूल्यों के प्रसार हेतु कला समूहों का निर्माण करने का संकल्प लिया गया।
सम्मेलन में उक्ताशय के प्रस्ताव किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम द्वारा रखे गए। संकल्प पत्र अरुण कुमार श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे समता सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से पारित किया।








