9 मार्च को जंतर-मंतर में आयोजित मज़दूर किसान संसद ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि वह कॉर्पोरेट-समर्थक, अमेरिका-समर्थक नीतियों और कानूनों को थोपने के आक्रामक और सत्तावादी उपायों को या तो छोड़ दे, अन्यथा किसानों और मज़दूरों की सभी राष्ट्र-विरोधी, जन-विरोधी नीतियों को वापस लेने तक पूरे भारत में लंबे समय तक विरोध का सामना करना पड़ेगा।
संघर्ष को तेज करते हुए देशभर में किसान और मज़दूर 23 मार्च शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाएंगे तथा 1 अप्रैल को 4 श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के खिलाफ अखिल भारतीय काला दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया है। साथ ही कॉर्पोरेट-विरोधी जन संघर्षों की घोषणा के लिए सभी राज्यों में महापंचायतें आयोजित की जाएंगी। जंतर मंतर में संयुक्त किसान मोर्चा एवं ट्रेड यूनियंस ने मोदी सरकार को किसान मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अमेरिकी व्यापार ट्रेड डील का कड़ा विरोध करते हुए व्यापार मामलों में अमेरिकी निर्देशों के आगे झुकना बंद करे, ईरान के खिलाफ युद्ध की निंदा करे और उसके तत्काल समाप्ति की मांग करे तथा विश्व शांति सुनिश्चित करे। साथ ही संसद ने ऐतिहासिक किसान आंदोलन के संदर्भ में 736 शहीदों के बलिदान के बावजूद 9 दिसंबर को SKM को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू न करने के लिए केंद्र सरकार की कड़ी निंदा की। घोषणा में संसद से कानून बनाकर C2+50% के आधार पर MSP पर सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने आदि की मांग की गई।

संसद ने भारत सरकार से भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे को अस्वीकार करने, बिजली (संशोधन) विधेयक को वापस लेने, बीज विधेयक 2025 को वापस लेने, VB GRAM G अधिनियम को रद्द करने और मनरेगा को बहाल कर उसमें 200 दिनों का काम तथा 700 रुपये प्रतिदिन की मज़दूरी सुनिश्चित करने की मांग की।
संसद की अध्यक्षता एक पैनल ने की जिसमें शहनाज़ रफ़ीक़ (INTUC), मुकेश कश्यप (AITUC), नारायण सिंह (HMS), ए. आर. सिंधु (CITU), आर.के. शर्मा (AIUTUC), लता (SEWA), राघव सिंह (AICCTU), गजराज सिंह (UTUC) केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे तथा पी. कृष्णप्रसाद (AIKS), राजन क्षीरसागर (AIKS AB), युधवीर सिंह (BKU), हंसराज राणा (AIKKMS), धर्मपाल सिंह (AIKKMS), सतीश आज़ाद (KKU), प्रेम सिंह गहलावत (AIKM), जोगिंदर सिंह नैन (NKU Nain) और सुनील तराई (किसान समिति) SKM का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
वक्ताओं में SKM से अशोक धावले (AIKS), रेवुला वेंकैया (AIKS AB), युधवीर सिंह (BKU टिकैत), सत्यवान (AIKKMS), आशीष मित्तल (AIKKMS), शशिकांत (KKU), डॉ. सुनीलम (KSS), पुरुषोत्तम शर्मा (AIKM), जोगिंदर नैन (BKU नैन), मनीष भारती (JKA) और कर्नैल सिंह इकोलाहा (AISKS) शामिल थे; तथा CTUs से अशोक सिंह (INTUC), अमरजीत कौर (AITUC), एच. सी. त्यागी (HMS), सुदीप दत्ता (CITU), राजेंद्र सिंह (AIUTUC), लता (SEWA), राजीव डिमरी (AICCTU) और शत्रुजीत (UTUC) शामिल थे। उक्त जानकारी मोर्चे के नेता किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता शिव सिंह ने दी है।







