चरण सिंह
कहने को तो हर राजनीतिक दल देश और समाज की बात करता है पर सभी को बस सत्ता चाहिए। देश और समाज राजनीतिक दलों से कही दूर छूटता जा रहा है। सत्ता पक्ष किसी भी तरह से सत्ता बचाना चाहता है और विपक्ष का प्रयास किसी भी तरह से सत्ता हासिल करना होता है। यही वजह है कि सभी दलों में विचार और संघर्ष लगभग खत्म होता जा रहा है। बदलाव भी इसलिए नहीं हो रहा है। सत्ता पक्ष ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाए गए तंत्रों को सत्ता बचाने के लिए लगा दिया है तो विपक्ष जातीय आंकड़ों पर सत्ता हासिल करने में लगा है। सड़कें सुनसान हैं और संसद आवारा है।
विपक्ष में बैठे दल अपने अपने वोटबैंक पर फोकस कर राजनीति कर रहे हैं। देश में एक ओर एलपीजी की किल्लत, लोगों को फिर से लाइन में लगा दिया गया है। यूजीसी एक्ट को लेकर सवर्ण मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। किसान अमेरिका के लिए भारत का कृषि बाजार खोलने पर सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। विदेशी मोर्चे पर मोदी के इजरायल से सटने से ईरान नाराज है। बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दे गायब हैं। अमेरिका के दबाव में तेल न खरीदने पर रूस से पहले ही नाराजगी मोल ले ली है। अब रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ी है। इजरायल के साथ खड़े होने से होमुर्ज स्टेट पर भारत के तेल और गैस के टैंकर फंस गए हैं। जिन दो टैंकरों को ईरान से जाने देने की अनुमति दी हैं वे भारतीय अवाम के चलते दी है।
बाकायदा ईरान के राष्ट्रपति ने बयान जारी कर यह कहा है। मतलब पीएम मोदी का चेहरा बेनकाब हो गया है। विश्व गुरु होने का दंभ भरने वाले मोदी की उपलब्धि बस गोदी मीडिया तक ही सीमित है। मोदी को ईरान से सबक लेना चाहिए। उनके इजरायल से सटने के बावजूद ईरान के भारतीयों के ईरान के प्रति सकारात्मक रुख की वजह से दो तेल के टैंक जाने दिए हैं। मतलब बड़ा दिल दिखाया है। फिर भी होमुर्ज स्टेट पर तेल और गैस टैंकर फंसे होने का संकट अभी टला नहीं है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत लगातार अमेरिका के दबाव में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका के दबाव में सीजफायर किया गया। टैरिफ लगाने के मामले में भी मोदी को अपमानित किया गया। रूस से तेल खरीदने में भी मोदी सरकार ट्रम्प के दबाव में दिखाई दिए। मोदी ने इजरायल और अमेरिका के चक्कर में ईरान और रूस जैसे परंपरागत दोस्त नाराज कर दिए। मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है पर विपक्ष के दल अपनी अपनी ढपली अपना-अपना राग नीति अपना रही है।

