पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने हाल ही में कहा कि अगर कांग्रेस मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे प्रमुख नगर निकायों में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस का प्राथमिक गठबंधन इंडिया गठबंधन (शिवसेना-यूबीटी और एनसीपी-एसपी) के साथ है, लेकिन अगर गठबंधन सहयोगी ऐसी पार्टियों (जैसे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के साथ जुड़ते हैं, जिनकी विचारधारा कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों से मेल नहीं खाती, तो कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं करेगी।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के नेताओं का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव, जैसे 29 नगर निगमों, 248 नगर परिषदों, 32 जिला परिषदों और 336 पंचायत समितियों के चुनाव, पार्टी के लिए 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी ताकत परखने का महत्वपूर्ण अवसर हैं। कई नेताओं ने सुझाव दिया है कि पार्टी को पहले अकेले चुनाव लड़कर अपनी संगठनात्मक क्षमता का आकलन करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चुनाव बाद गठबंधन की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को करना है। दिल्ली में हाल ही में हुई बैठकों में इस रणनीति पर चर्चा हुई, और सूत्रों के अनुसार, विशेष रूप से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में अकेले उतरने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। यह रुख शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की बढ़ती नजदीकियों के बाद और मजबूत हुआ है, जिससे महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में कुछ तनाव पैदा हुआ है।
दूसरी ओर, कुछ नेताओं का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ने से कांग्रेस को उन क्षेत्रों में कठिनाई हो सकती है जहां उसका आधार कमजोर है, और गठबंधन की ताकत का अभाव चुनौतियां बढ़ा सकता है। फिर भी, पार्टी का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि यह रणनीति जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेगी और लंबे समय में पार्टी को मजबूत करेगी।

