कांग्रेस की सबसे बड़ी नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। बैठक में भूपेश बघेल, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक, अंबिका सोनी और कुमारी शैलजा समेत कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य मौजूद हैं। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बैठक में बुलाया गया है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव को कमजोर कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की ‘कठपुतली’ बन गए हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची है। उन्होंने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के नियमों में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाया और इन्हें अवैध बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूचियों में किए गए हर बड़े बदलाव का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने नाम हटाए गए और किन वजहों से कार्रवाई हुई।
हटाए गए मतदाताओं को अपील का मौका देने की मांग
खरगे ने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए. साथ ही, ऐसे लोगों को अपना पक्ष रखने और फैसले के खिलाफ अपील करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों को भी मतदाता सूचियां और संबंधित आंकड़े समय पर उपलब्ध कराने की मांग की. खरगे के मुताबिक, यह जानकारी सरल और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्रारूप में होनी चाहिए।
SIR और CEC के मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति
सीडब्ल्यूसी की बैठक में SIR, चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही है। पार्टी पहले भी कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुकी है, वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय और सुझाव संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके आदेश कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हैं. आयोग ने फॉर्म-6 और SIR से जुड़े फैसलों का भी बचाव किया है।

