नई दिल्ली । परिसीमन के मुद्दे पर एक बार फिर कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि क्या उसके पास इस प्रक्रिया को लेकर कोई नया प्रस्ताव है या फिर सरकार पिछले बजट सत्र में गिर चुके संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा लाने की तैयारी कर रही है। जयराम रमेश ने यह सवाल संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दिए गए जवाब के बाद सरकार से पूछा।
मंगलवार को जयराम रमेश ने कहा कि क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन को लेकर कोई ठोस नया प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी राजनीतिक दल के साथ चर्चा की है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार सदन में गिर चुके विधेयक को दोबारा पेश कर दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने की कोशिश करेगी। उन्होंने दावा किया कि अगर ऐसा होता है कि ऐसा प्रयास भी सफल नहीं होगा।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रही सरकार?
कांग्रेस ने अपने जवाब में परिसीमन विधेयक पर सरकार के साथ बातचीत के लिए तारीख नहीं देने के आरोप पर सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी। रिजिजू ने कहा था कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए समय मांगे जाने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने कोई तारीख तय नहीं की।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या कांग्रेस नए प्रस्ताव के बारे में सवाल पूछकर सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रही है। इसकी वजह यह भी है कि समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल समेत कई दल परिसीमन योजना को लेकर सरकार के प्रतिनिधियों से चर्चा कर चुके हैं। इस बीच, ऐसी अटकलें भी हैं कि परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद के मानसून सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
मानसून सत्र पर इस बार कांग्रेस का बदला रुख
मानसून सत्र को अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किए जाने के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने इस बार सरकार की आलोचना नहीं की। इससे पहले किरेन रिजिजू ने उदाहरण देते हुए बताया था कि संसद के सत्रावसान में पहले भी लंबा अंतराल रहा है। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान 87 दिनों तक सत्रावसान नहीं होने का उदाहरण भी दिया था।







