जीवन क्षणभंगुर है, कभी भी किसी की भी सांसें थम सकती है, मौत हो सकती है, यह अंतिम सत्य और तथ्य है; लेकिन अपने संघर्ष के साथी की मौत की खबर मिली तो मन विचलित हो गया।
अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉमरेड प्रेमसिंह गहलावत नहीं रहे । वे अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने आए थे और वहीं से सदा के लिए हमारे बीच से चले गए। प्रेमसिंह गहलावत जी के साथ मेरी पहली मुलाकात इलाहाबाद में किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ हुई थीं। जब अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का गठन हुआ उसके बाद से लगातार हर बैठकों, सम्मेलनों और आंदोलनों में उनसे मुलाकात होने लगी। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के दिल्ली के दो प्रदर्शनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी उन्होंने कन्वीनर वी एम सिंह के साथ कुशलतापूर्वक निभाई थी । बाद में जब संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली की बॉर्डर पर पक्के मोर्चे लगाए तब भी प्रेमसिंह जी के साथ लगातार मुलाकात होती थीं।
उनकी पूरे 380 दिन उपस्थिति रही। आंदोलन स्थगित हो जाने के बाद पिछले 5 वर्षों में संयुक्त किसान मोर्चे की लगभग हर बैठकों में कॉमरेड से मुलाकात होते रहती थी।
मैं कई बार उनके साथ हरियाणा की बैठकों में भी जाया करता था। मेरा उनके साथ हंसी मजाक का आत्मीय रिश्ता था। हम बैठकों में एक दूसरे पर टीका टिप्पणी भी किया करते थे, वे अपनी दो टूक टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे ।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के गठन से लेकर दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी की पिछली बैठक तक लगातार मुलाकात होती रही। प्रेमसिंह गहलावत जी के असामयिक निधन से देश के किसान आंदोलन, अखिल भारतीय किसान महासभा, संयुक्त किसान मोर्चा को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई होना कठिन होगा।
अलविदा प्रेमसिंह गहलावत जी ! संयुक्त किसान मोर्चे की बैठकों में आपकी कमी महसूस की जाएगी ! सशरीर आप बैठक में भले ही उपस्थित नहीं होंगे लेकिन आपके विचार, आपकी प्रतिबद्धताएं, आपकी बेबाकी और निर्भयता हमें सदा प्रेरणा देती रहेगी !
कॉमरेड प्रेम सिंह जी को लाल सलाम !
एड शिवसिंह
राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता
किसान संघर्ष समिति

