विधायक ने तुरंत उन्हें रोका और प्यार से समझाया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि “पिताजी ने दी है या घर से लेके भाग आए?” – यानी बाइक उनके पिता ने दी है या वे घर से चुपके से ले भागे हैं। यह सवाल बच्चों को उनकी गलती का अहसास कराने के लिए था। विधायक ने जोर देकर कहा कि कम उम्र में वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है, और हेलमेट न पहनना या ज्यादा सवारी बैठाना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बच्चों को चेतावनी दी कि ऐसी लापरवाही से न सिर्फ उनकी जान को खतरा है, बल्कि दूसरों की सुरक्षा भी दांव पर लग जाती है।
स्थान: पगरावद-पोलायकलां मार्ग, शाजापुर जिला, मध्य प्रदेश।
तिथि: 22 सितंबर 2025 (आज से एक दिन पहले)।
कारण: नाबालिगों द्वारा बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट के बाइक चलाना, साथ ही ओवरलोडिंग।
विधायक का संदेश: बच्चों को माता-पिता की आज्ञा के बिना वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की नसीहत दी।
यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग विधायक की संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “मासूमों को बचाने वाली मिसाल” बताया है।
क्यों है यह खास?
भारत में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाएं आम हैं, जो अक्सर हादसों का कारण बनती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में ही सैकड़ों ऐसी दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें बच्चे घायल या मृत हुए। विधायक का यह कदम जागरूकता फैलाने वाला है और स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक नियमों के प्रति सतर्कता बढ़ा सकता है।

