दिल्ली एमसीडी उपचुनाव में यमुना की सफाई बना मुख्य मुद्दा!

कांग्रेस ने लगाया घोटाले का आरोप तो जल की क्वालिटी को लेकर घेरा

बीजेपी ने यमुना में तामझाम की अच्छा माहौल बनाने की कोशिश

नई दिल्ली। एमसीडी उप चुनाव में यमुना सफाई का मुख्य मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस आप और बीजेपी दोनों पर घोटाले का आरोप लगा रही है तो तामझाम के दम पर माहौल बनाने में लगी है। दरअसल यमुना में गंदगी को लेकर आप सरकार को कटघरे में खड़ा कर सत्ता हासिल कर ले गई और अब बारी बीजेपी की खिंचाई करने की है। छठ पूजा में यमुना सफाई को लेकर जमकर राजनीति हुई। आप और कांग्रेस ने यमुना के पानी को लेकर रेखा सरकार को कोसा तो बीजेपी ने तमाम तामझाम कर यमुना सफाई पर काम होने को जताने की कोशिश की।
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में छठ के त्यौहार के सहारे वोटरों को लुभाने का प्रयास किया गया। बीजेपी ने यमुना में प्रधानमंत्री के नहाने को लेकर अलग से बिसलरी पानी से प्रधानमंत्री के नहाने की व्यवस्था कर दी। हालांकि आलोचना होते देख प्रधानमंत्री उसमें नहाने नहीं गए। दिल्ली एमसीडी चुनाव को देखते हुए यमुना सफाई का मुद्दा उछाल दिया गया है।

जहां कांग्रेस यमुना सफाई में घोटाले का आरोप लगा रही है वहीं आप की पिछली सरकार पर CBI जांच की मांग उठने लगी है।दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर AAP सरकार के यमुना सफाई के नाम पर हुए 6856 करोड़ के कथित घोटाले की CBI जांच की मांग की है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने शुक्रवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान यमुना सफाई के नाम पर हुए कथित 6856 करोड़ रुपये के घोटाले की CBI जांच कराने की मांग की है। यादव ने आरोप लगाया कि AAP और बीजेपी दोनों ही दलों की सरकारों ने यमुना की सफाई को महज दिखावा बनाकर रखा और दिल्लीवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने आगे कहा यमुना सफाई के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. केजरीवाल सरकार के 11 साल और मौजूदा रेखा गुप्ता सरकार के 8 महीनों में वायु व जल प्रदूषण पर काबू पाने में दोनों पूरी तरह नाकाम रही हैं। राजधानी में हर 100 मौतों में से 15 प्रदूषण की वजह से हो रही है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए देवेंद्र यादव ने बताया कि 2017 से 2022 के बीच आप सरकार ने यमुना सफाई पर 6856 करोड़ रुपये खर्च किए, मगर नदी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह पैसा सीधे करदाताओं की जेब से गया। इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हमने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे इसकी CBI जांच करवाएं और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजें. यादव ने पत्र की कॉपी मीडिया को भी सौंपी।

यमुना दिल्लीवासियों के लिए आस्था का प्रतीक

कांग्रेस नेता ने दोनों पार्टियों पर हमला बोलते हुए कहा कि यमुना दिल्लीवासियों के लिए आस्था का प्रतीक है, लेकिन AAP हो या बीजेपी, दोनों ने सिर्फ दावे किए, काम कुछ नहीं. CSE की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पैसा फूंकने से नदी साफ नहीं होगी। प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की क्षमता बढ़ाना, इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट, वृक्षारोपण और जन जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार, नागरिक और एक्सपर्ट्स को मिलकर काम करना होगा, लेकिन बीजेपी सरकार ने अब तक यमुना के जहरीले पानी को साफ करने की दिशा में एक कदम भी नहीं उठाया।
उधर आप के नेता भारद्वाज ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निरीक्षण पर आधारित RTI निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि अक्षरधाम, कोंडली, ओखला, केशोपुर जैसे सभी प्रमुख STP विफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की रिपोर्टों में कथित अनियमितताओं के बाद CPCB को स्वतंत्र परीक्षण का आदेश दिया था
यमुना की सफाई को लेकर दिल्ली की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घमासान छिड़ गया. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निरीक्षण परीक्षणों में विफल हो गए हैं और भाजपा के ‘स्वच्छ यमुना’ के दावों को महज ‘प्रचार का हथकंडा’ बताया. पलटवार करते हुए, भाजपा ने इन विफलताओं के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार के एक दशक लंबे शासन को जिम्मेदार ठहराया.

AAP का बड़ा हमला: ‘स्वच्छ यमुना’ का दावा झूठा, RTI में खुली पोल

AAP मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर यमुना की सफ़ाई के झूठे वादों से लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया. सौरभ भारद्वाज ने कहा, “उन्होंने डींगें हाँकीं कि अरविंद केजरीवाल दस साल में यमुना को साफ़ नहीं कर पाए, जबकि उन्होंने इसे सिर्फ़ आठ महीनों में कर दिखाया. उनके झूठे ‘यमुना साफ़’ तमाशे की हक़ीक़त पूरी दुनिया को पता चल चुकी है. सबसे चौंकाने वाली बात तो RTI से मिली जानकारी है, जिससे पता चलता है कि दिल्ली के सभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निरीक्षण में फेल हो गए है।
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