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चंद्रशेखर आज़ाद ने महाबोधि मंदिर को बनाया चुनावी मुद्दा !

चरण सिंह 

बोधगया में महाबोधि मंदिर कोई बोध समुदाय को सुपुर्द करने को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे बौद्ध भिक्षुओं का मामला बड़ा रूप ले रहा है। जनकारी मिल रही है कि इस आंदोलन को चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय रतन सिंह को बोधगया बौद्ध भिक्षुओं के आंदोलन में भेजा।

विजय रतन सिंह ने बोधगया आंदोलन में पहुंचकर ऐलान कर दिया कि इस मुद्दे पर पटना से लेकर बोधगया तक एक रैली निकाली जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह दिल्ली में बिहार भवन घेर कर इस मुद्दे को उठाएंगे। यह आंदोलन कितना बड़ा बनने जा रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रायबरेली में बौद्ध समुदाय ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर महाबोधि मंदिर बौद्ध समुदाय को सौपने की मांग की गई है।
दरअसल बोधगया में महाबोधि मंदिर के पास बौद्ध भिक्षु मंदिर को बौद्ध समुदाय को सौंपने की की मांग के लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन को 500 बोध संगठनों को समर्थन प्राप्त होने की बात सामने आ रही है। श्रीलंका, थाईलैंड और मंगोलिया से भी बौद्ध संघ से जुड़े संगठन इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। मतलब बौद्ध समुदाय ने महाबोधि मंदिर मुद्दे को बड़ा करने का मन बना लिया है।
देखने की बात यह है कि बार में इस साल विधानसभा चुनाव हैं। इन चुनाव में दलित वोटबैंक पर सभी दलों की निगाहें हैं। कांग्रेस ने बाबा साहेब को लेकर बड़ा अभियान छेड़ दिया है। कांग्रेस बिहार में अपना पुराना वोटबैंक हासिल करना चाहती है। ऐसे में जब चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और अशोक चौधरी दलित नेता हैं। दलित और महादलित वोट बैंक पर नीतीश कुमार का होल्ड बताया जाता है। अब देखना यह होगा कि दलित वोट बैंक नीतीश कुमार को ही अपना नेता मानता है या नहीं।
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