बुंदेलखंड के मिनी वृंदावन में बीजेपी के राजपूत बनाम यादव की जंग

पिछले चुनाव की बात करें तो बृजभूषण राजपूत ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार उर्मिला देवी को 44,014 वोटों के अंतर से हराया था

द न्यूज 15 
लखनऊ। दो चरणों के मतदान के बाद अब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का अगला पड़ाव बुंदेलखंड का इलाका है। बुंदेलखंड के महोबा जिले की बात करें तो यहां एक सीट है चरखारी (Charkhari), जिसको लेकर काफी चर्चाएं हैं। चरखारी सीट को बुंदेलखंड का कश्मीर और मिनी वृंदावन भी कहा जाता है। यहां पर 108 भगवान कृष्ण के मंदिर हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। एक तरफ भाजपा के टिकट पर वर्तमान विधायक बृजभूषण राजपूत हैं तो उनके सामने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रामजीवन यादव हैं। उमा भारती के यहां से चुनाव लड़ने के बाद से ये हॉट सीट मानी जाती है।
2012 में उमा भारती यहां से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुकी हैं। इस सीट पर चुनाव लड़ रहे वर्तमान भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के बड़े बेटे हैं। राजपूत अपनी विवादित बयानबाजी के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं, जबकि हिंदुत्व वाली छवि भी उनको चर्चा में बनाए रखती है। माना जा रहा है कि लोधी बहुल इस क्षेत्र में बीजेपी और सपा एक बार फिर आमने-सामने मुकाबले में रहेंगे। रामजीवन पूर्व में भी इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके है, लेकिन अबकी सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
चरखारी को बुंदेलखंड का कश्मीर भी कहा जाता है। सूबे के पहले मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत जब चरखारी आए थे तो यहां की सुंदरता देखकर वो मोहित हो गए थे और उन्होंने चरखारी को बुंदेलखंड का कश्मीर नाम दिया था। चरखारी को यहां के राजाओं से मिली पहचान आज भी कायम है। इस बार के विधानसभा चुनाव में यहां बाहरी का मुद्दा भी काफी चर्चा में बताया जा रहा है। सपा के उम्मीदवार महोबा से हैं जबकि बृजभूषण जालौन से आते हैं। पिछले चुनाव की बात करें तो बृजभूषण राजपूत ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार उर्मिला देवी को 44,014 वोटों के अंतर से हराया था।
पानी की समस्या इस इलाके की सबसे बड़ी समस्या रही है। एक तरफ सरकार और भाजपा यहां के लिए योजनाएं गिना रही हैं तो दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो सरकार के प्रयासों को नाकाफी बता रहे हैं। चरखारी में बस स्टॉप का न होना यहां का सबसे पुराना मुद्दा है। वहीं, स्कूलों में अध्यापकों की कमी भी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा चरखारी में कोई बड़ा अस्पताल नहीं है, इस कारण लोगों को बेहतर के इलाज के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जातीय समीकरण की बात करें तो यहां लोधी राजपूत की संख्या 70-72 हजार के करीब है, दलित समाज की संख्या 45 हजार, कुशवाहा 30 हजार, ब्राह्मण 22 हजार, साहू 19-20 हजार और मुसलमान 19-20 हजार हैं।
पिछले कुछ चुनावों के नतीजे
1993: उदय प्रकाश, बसपा
1996: छोटे लाल, भाजपा
2002: अंबेश कुमारी, सपा
2007: अनिल कुमार अहिरवार, बसपा
2012: उमा भारती, भाजपा
2014: कप्तान सिंह, सपा
2015: उर्मिला राजपूत, सपा
2017: बृजभूषण राजपूत, भाजपा

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