चरण सिंह
बीजेपी देश में कैसा हिंदुत्व तैयार कर रही है। इसका बड़ा उदाहरण हाल ही में ललितपुर की एक गौशाला में घटित घटना है। दरअसल जब इस गोशाला में गाय बीमार होने लगीं, मरने लगीं तो एक पत्रकार इस गोशाला में कवरेज करने के लिए पहुंच गया। इस गोशाला के सचिव ने गोशाला में काम कर रहीं महिलाओं को इस पत्रकार के पीछे दौड़ा दिया। मतलब महिलाओं को यह समझ में नहीं आया कि यह पत्रकार तो गायों की भलाई के लिए आया था। ये महिलाएं भी इस गोशाला में गायों के नाम से ही कार सेवा करने आई होंगी। इनको उन लोगों का निर्देश अच्छा लगा जो गोशाला चला रहे हैं।
बीजेपी के अंध समर्थकों का यही हाल है कि बीजेपी की गतिविधियों से भले ही हिन्दुओं का भी को भला न हो। क्योंकि बीजेपी की आईटी सेल और गोदी मीडिया ने बीजेपी की छवि हिन्दुओं की रक्षक की बना दी है तो इन समर्थकों को बीजेपी का हर कदम अच्छा लगता है। ये लोग हैं कि अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। पीएम मोदी ने दो करोड़ रोजगार प्रति वर्ष देने का वादा किया। 100 स्मार्ट सिटी और 100 स्मार्ट विलेज का वादा किया गया। विदेश से काला धन वापस लाने का वादा किया। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया। कितने वादे मोदी ने निभाए ? इससे इनको कोई मतलब नहीं। इनके बच्चों को रोजगार मिले या न मिले इससे भी इनको कोई मतलब नहीं।
देश के हिन्दुओं में बीजेपी की आईटी सेल, गोदी मीडिया और बीजेपी नेता यह माहौल बनाने में लगे हैं कि जैसे बीजेपी ही देश है। पीएम मोदी का विरोध देश का विरोध है। स्थिति यह हो गई है कि हिन्दू मुस्लिम तो छोड़िये यदि बीजेपी समर्थक का भाई या दोस्त भी बीजेपी या मोदी का वैचारिक विरोध करता है तो उसको वह भी दुश्मन नजर आने लगता है। बीजेपी ने बड़ी चालाकी से आजादी की लड़ाई में दिए गए बलिदान को बैकफुट पर कर राजतंत्र को आगे कर दिया है। ये लोग यह समझने को तैयार नहीं कि देश आजाद हुआ तभी तो मोदी प्रधानमंत्री बने और योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। यह बात इनको समझ में नहीं आती कि क्या राजतंत्र में इनमें से कोई राजा बन सकता था ? देश आजाद हुआ और लोकतंत्र स्थापित हुआ तो आम आदमी के लिए राजा बनने का रास्ता प्रशस्त हुआ।
मुस्लिम के प्रति नफरत का जहर घोल रही बीजेपी देश को यह भी तो बताए कि क्या बिना मुस्लिमों के यह आज़ादी की लड़ाई जीती जा सकती थी ? अब्दुल गफ्फार खान कौन थे ? अशफाक उल्ला खां कौन थे ? अब्दुल कलाम कौन थे ? भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी क्या किसी जाति या धर्म विशेष के लिए आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुए थे ? वीर अब्दुल हमीद क्या पाकिस्तानी सेना से अपने धर्म के लिए लड़े थे।
चाहे, महात्मा गांधी हों, जवाहर लाल नेहरू हों, डॉ. राम मनोहर, जेपी, कर्पूरी ठाकुर जैसे समाजवादी जाति और धर्म के लिए लड़े थे। प्रकृति से कुछ सीख लो क्या हवा जाति धर्म देखती है ? क्या धूप जाति धर्म देखती है ? क्या सूर्य क्या बादल किसी जाति या धर्म विशेष के लिए ही बरसते हैं ?
ऐसा नहीं है कि विपक्ष को जनहित की लड़ाई लड़ रहा हो। विपक्ष भी जनहित के मुद्दे नहीं उठा पा रहा है। उसे हर हाल में सत्ता चाहिए। जनता के लिए उसे कोई संघर्ष नहीं करना है। जाति गत आंकड़े के बल पर चुनाव जीतने की फ़िराक में रहता है। जाति और धर्म से ऊपर उठकर जनहित में सड़कों पर नहीं उतर पा रहा है। एसआईआर से जब बिहार में जनता को नहीं जोड़ पाए तो एसआईआर के पीछे क्यों पड़े हैं। विपक्ष जब तक जनहित के मुद्दे पर एकजुट होकर नहीं लड़ेगा तब तक विपक्ष को जनता से मजबूती नहीं मिलेगी।






