हिजाब विवाद पर अर्जी दायर करने वाली छात्राओं को भाजपा नेता ने बताया आतंकी, कहा- ट्रेनिंग ली है

द न्यूज 15

बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी के नेता यशपाल सुवर्ण ने हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट जाने वाली छात्राओं को ‘आतंकी संगठन’ का सदस्य बताया है।  साथ ही उन्होंने आरोप लगाए है कि छात्राओं ने आतंकी संगठन से ट्रेनिंग हासिल की है। इस दौरान सुवर्ण ने एजेंसियों से छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। मंगलवार को उच्च न्यायालय ने स्कूल-कॉलेजों में वर्दी को लेकर राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा था। साथ ही हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में भाजपा ओबीसी मोर्चा के महासचिव सुवर्ण ने कहा, ‘जो 6 छात्राएं यह कहते हुए कोर्ट गईं थी कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगी, उन्होंने ऐसे बयान दिए हैं, जिससे हमारी न्यायपालिका की बदनामी हुई है। उन्होंने खुद को वैसा साबित कर दिया है, जैसा मैंने पहले कहा था कि वे 6 छात्राएं नहीं हैं, वे आतंकी संगठन की सदस्य हैं। तीन न्यायाधीशों के खिलाफ उन्होंने जिस तरह से बयान दिए, वह साबित करते हैं वे आतंकी संगठन से जुड़ी हुई हैं।’ सुवर्ण उडुपी कॉलेज विकास समिति (CDC) के उपाध्यक्ष भी हैं।
उन्होंने आरोप लगाए कि हैदराबाद से आतंकी संगठन यहा आया था और उन्हें ट्रेनिंग देकर गया है कि मीडिया के सामने क्या बयान देने चाहिए। सुवर्ण ने कहा, ‘हम संबंधित एजेंसियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग करते हैं। जो लोग इस तरह के बयान देते हैं, उन्हें यहां रहने या काम करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। उन्हें उस देश चले जाना चाहिए, जहां वे अपना धर्म मान सकें। उन्हें दूसरे गरीब छात्रों को परेशान नहीं करना चाहिए।’
भाजपा नेता ने कहा कि लड़कियों का मकसद शिक्षा नीति को बर्बाद करना और दूसरे छात्रों को तंग करना था। सुवर्ण ने सवाल किया, ‘जब ये लड़कियां जजों को फैसले को राजनीति से प्रेरित और कानून के खिलाफ बता रही हैं, तो हम इनसे क्या उम्मीद करेंगे?’ भाजपा नेता ने कहा, ‘उन्होंने केवल यह दिखा दिया है कि वे राष्ट्र-विरोधी हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमें यह भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा, जो पूरे देश के लिए फायदेमंद होगा।’
एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमने मुद्दों को सुलझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका वह मकसद नहीं था। वे पढ़ना नहीं चाहते थे, परीक्षा में नहीं बैठना चाहते थे। उनका मकसद शिक्षा नीति को बर्बाद करना और दूसरे छात्रों को परेशान करना था। बाद में उन्होंने केवल अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दे दिया। हाईकोर्ट ने उनका आवेदन खारिज कर दिया है, जिसका मतलब है कि हमारे संविधान में कक्षा में हिजाब पहनने का कोई प्रावधान नहीं है, तो उन्हें हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करना चाहिए और अगर चाहें, तो क्लास में आना चाहिए।’ सुवर्ण ने जिक्र किया कि जब लोगों ने सिद्धारमैया को भगवा पहनने के लिए कहा, तो उन्होंने कपड़ा फेंक दिया था। लेकिन उरूस में उन्हें वह टोपी पहनने से कोई परेशानी नहीं हुई, जो इस्लाम का प्रतीक है। उन्होंने दोहराया कि उनके पुराने बयान यही थे कि जो लोग कानून का सम्मान करते हैं, उन्हें यहां कॉलेज में पढ़ने की अनुमति मिलगी और बाकी लोग इस देश के नागकिर होने के लिए योग्य नहीं है।

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