बता दें यूपी में बीते दिनों काबीना विस्तार के बाद अब दावा किया जा रहा है कि संगठन, निगमों और आयोगों में खाली पदों पर भी भर्ती एवं नियुक्ति की जाएगी। वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बीजेपी अपने सभी कील कांटे दुरुस्त कर लेना चाहती है ताकि वह मजबूती के साथ विपक्ष का सामना कर सके। समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले को लेकर बीजेपी पहले से ही सतर्क है जिसका असर हालिया काबीना विस्तार में भी दिखा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों के समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
यूपी कैबिनेट में कौन सा मंत्री किस वर्ग का?
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्तर पर भी बीजेपी ने व्यापक सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। वैश्य समाज से नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल और रवींद्र जायसवाल को शामिल किया गया है। ओबीसी वर्ग में संदीप सिंह, गिरीश चंद्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, नरेंद्र कश्यप, सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल जैसे नेता मौजूद हैं. दलित समुदाय से गुलाब देवी और असीम अरुण को प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं क्षत्रिय समाज से जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह और दिनेश प्रताप सिंह मंत्री हैं. ब्राह्मण समाज से दयाशंकर मिश्र दयालु को जगह मिली है, जबकि अरुण सक्सेना सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। विस्तार से पहले योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री थे और छह पद रिक्त थे, जिन्हें अब भर दिया गया है।

