बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्य को दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी दी है। यह घोषणा केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में की गई, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इन परियोजनाओं से यात्रा का समय कम होगा, व्यापार बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। आइए विस्तार से जानते हैं:
1. मोकामा-मुंगेर 4-लेन नेशनल हाईवे
विवरण: मोकामा (पटना जिला) से मुंगेर तक लगभग 82.4 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे (NH-80) को 4-लेन में बदला जाएगा। यह सड़क हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) पर बनेगी, जो बड़हिया, लखीसराय, जमालपुर जैसे शहरों को जोड़ेगी।
लागत और समय: कुल लागत करीब 5,013 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है, और यह पटना से पूर्वी बिहार के हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा।
फायदा: इससे पटना से मुंगेर और आगे भागलपुर की यात्रा आसान हो जाएगी। वर्तमान में दो-लेन वाली सड़क पर ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। यह ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट पर बनेगी, जो तीन जिलों (पटना, लखीसराय, मुंगेर) के 89 गांवों से गुजरेगी।
2. भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट डबल ट्रैक रेल परियोजना
विवरण: भागलपुर (बिहार) से दुमका (झारखंड) होते हुए रामपुरहाट (पश्चिम बंगाल) तक 177 किलोमीटर लंबी सिंगल रेल लाइन को डबल ट्रैक में बदला जाएगा। यह परियोजना बिहार के पूर्वी हिस्से को झारखंड और बंगाल से जोड़ेगी।
लागत और समय: कुल निवेश 3,169 करोड़ रुपये का होगा। रेल मंत्रालय के तहत यह काम तेजी से पूरा करने का लक्ष्य है।
फायदा: रेल यात्रा की क्षमता दोगुनी हो जाएगी, जिससे माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। यह बिहार के भागलपुर, संथाल परगना (झारखंड) और मालदा-फरक्का (बंगाल) क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करेगा।
चुनावी संदर्भ
ये घोषणाएं बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले आई हैं, जो अक्टूबर-नवंबर में होने वाले हैं। केंद्र सरकार की यह पहल राज्य में विकास को गति देने और मतदाताओं को सौगात देने के रूप में देखी जा रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। इससे पहले भी बिहार में कई सड़क और रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन ये नई मंजूरियां विशेष रूप से पूर्वी बिहार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ये परियोजनाएं पूरी होने पर बिहार की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लाएंगी, खासकर चुनावी वर्ष में विकास के वादों को मजबूत करेंगी।








