बिहार विधानसभा चुनाव के बीच लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। यह मामला हाल ही में पटना में एक प्रेस इंटरैक्शन के दौरान सामने आया, जहां पत्रकारों ने तेज प्रताप से तेजस्वी के घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) या योजनाओं पर सवाल पूछे। तेज प्रताप ने गुस्से में कहा, “आप हमसे तेजस्वी यादव के बारे में क्यों पूछते हैं? हमेशा तेजस्वी का सवाल काहे करते हैं? बार-बार तेजस्वी जी को लेकर क्यों सवाल करते हो, और भी तो कितने नेता हैं।”
क्यों नाराज हुए तेज प्रताप?
मीडिया का फोकस भाई पर: तेज प्रताप अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ (जेजेडी) के एजेंडे पर जोर दे रहे हैं, जैसे पलायन रोकना, बेरोजगारी दूर करना और महुआ सीट से अपनी उम्मीदवारी। लेकिन पत्रकार हर बार तेजस्वी की योजनाओं, आरजेडी की रणनीति या परिवारिक दरार पर सवाल चिपकाए रहते हैं। इससे वे खिन्न हो गए और बोले कि वे अपने बलबूते पर
चुनाव लड़ रहे हैं, न कि भाई की छाया में।
परिवारिक और राजनीतिक दरार: तेज प्रताप को आरजेडी से निष्कासित कर दिया गया था (2024 में), जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बना ली। वे महुआ से आरजेडी प्रत्याशी के खिलाफ लड़ रहे हैं। लालू जी ने तेजस्वी को महागठबंधन का सीएम फेस बनाया, जबकि तेज प्रताप को दरकिनार कर दिया। तेज प्रताप ने तंज कसा कि तेजस्वी “लालू की छत्रछाया” में रहकर खुद को ‘नायक’ या ‘जननायक’ बता रहे हैं, जबकि असली जननायक कर्पूरी ठाकुर, लोहिया या अंबेडकर जैसे हैं।
अन्य संकेत: तेज प्रताप ने तेजस्वी को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अनफॉलो कर दिया है, जो परिवारिक तनाव को दिखाता है। वे कहते हैं कि बिहार की जनता तय करेगी कि सीएम कौन बनेगा, न कि पोस्टर या घोषणाएं।
यह नाराजगी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी लगती है, क्योंकि तेज प्रताप अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी ने इस पर चुप्पी साधी है, लेकिन कहा कि लालू का फैसला सबको मानना चाहिए। चुनावी घमासान में यह भाई-भाई की जंग बिहार की सियासत को और रोचक बना रही है।








